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भारतीय खिलौना उद्योग को कैसे मिलेगा बढ़ावा?: मुक्त व्यापार समझौतों से होगा लाभ, क्या चल रही है तैयारी

Thu, 02 Jul 2026 05:39 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

भारत के मुक्त व्यापार समझौतों, खासकर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों से खिलौना निर्यात को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। इन बाजारों में भारतीय खिलौनों को आयात शुल्क खत्म होने के बाद आसान पहुंच मिलेगी, जिससे निर्यात बढ़ सकता है। पढ़िए रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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भारत की ओर से किए गए कई मुक्त व्यापार समझौते खिलौनों के निर्यात को बड़ा लाभ देंगे। इनमें ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए समझौते भी शामिल हैं। उद्योग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
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टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने क्या कहा?
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनु गुप्ता ने कहा, 'यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ समझौतों से भारतीय खिलौनों को इन बाजारों में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा। फिलहाल इन दोनों बाजारों में भारतीय खिलौनों पर लगभग पांच से छह फीसदी आयात शुल्क (टैरिफ) लगता है।'

उन्होंने कहा, 'ये समझौते भारतीय खिलौना उद्योग को बड़े स्तर पर आगे ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि ये बाजार भारत के कुल खिलौना निर्यात का लगभग 16 फीसदी हिस्सा हैं, जो वर्ष 2024 में लगभग 35 करोड़ अमेरिकी डॉलर रहा।'
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भारत ने पिछले वर्ष ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता किया था, जो 15 जुलाई से लागू होगा। यूरोपीय संघ के साथ समझौता इस वर्ष दिसंबर तक होने की संभावना है और अगले वर्ष लागू हो सकता है।

'उज्जैन में स्थापित होगी इकाई'
मनु गुप्ता एक खिलौना कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की उद्योग के अनुकूल नीतियों के कारण इस क्षेत्र में बड़ा निवेश आ रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने उज्जैन में उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 82 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी में अभी लगभग 500 कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह संख्या जल्द ही 800 तक बढ़ाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि एक और बड़ा निवेश आने की तैयारी में है। 

'भारत में अच्छी परीक्षण सुविधाओं की जरूरत' 
सनलॉर्ड समूह के प्रतिनिधि अमिताभ खारबंदा ने कहा कि भारतीय उद्योग को इन व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इससे निर्यात के बड़े अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में गुणवत्ता और नियम बहुत सख्त हैं, जिन्हें भारतीय खिलौना निर्माताओं को पूरा करना होगा।

उन्होंने कहा, भारत में अच्छी परीक्षण सुविधाओं की जरूरत है। सरकार इस दिशा में मदद कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी बिहार के बिहटा में एक इकाई स्थापित कर रही है। 

भारत मंडपम में होगी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी
खिलौना उद्योग के विकास को दिखाने के लिए संगठन चार दिन की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है, जो चार जुलाई से भारत मंडपम में शुरू होगी। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे।

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प्रदर्शनी में क्या खास रहेगा?
  • इस प्रदर्शनी में 300 से अधिक भारतीय कंपनियां हिस्सा लेंगी, जो शिक्षा, प्लास्टिक, मुलायम और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों सहित लगभग 400 ब्रांड प्रदर्शित करेंगी। 
  • आयोजकों ने बताया कि लगभग 20 हजार घरेलू आगंतुकों के आने की उम्मीद है। साथ ही यूरोप, पश्चिम एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, अमेरिका और दक्षिण अमेरिका से भी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।
  • उन्होंने कहा कि अमेरिका भारतीय खिलौना उद्योग का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
  • भारत का वैश्विक खिलौना निर्यात में हिस्सा अभी लगभग 0.3 फीसदी है, जिसे बढ़ाने की बड़ी संभावना है।
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