पुणे पुलिस ने एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है जिसमें स्पोर्ट्स कोटे के तहत सरकारी नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को कुराश टूर्नामेंट के 1,000 से ज्यादा नकली सर्टिफिकेट बांटे गए। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
क्या है आरोप?
गिरफ्तार किए गए आरोपी पर आरोप है कि उन्होंने ऐसी राज्य-स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए नकली रिकॉर्ड बनाए जो कभी हुईं ही नहीं थीं। पुलिस ने कम से कम 60 ऐसे लोगों की पहचान की है जिन्होंने सरकारी पदों के लिए आवेदन करने में इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। यह आरोप महाराष्ट्र कुराश एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव पर है।
क्या है कुराश?
कुराश, सेंट्रल एशिया में शुरू हुई जैकेट पहनकर की जाने वाली कुश्ती का एक प्रकार है। पुलिस ने बताया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खेल है। महाराष्ट्र में 2012 से 'कुराश एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र' के तहत खेला जा रहा है।
अधिकारी ने क्या बताया?
अधिकारी ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब पुलिस को एक शिकायत मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्पोर्ट्स कोटे के तहत सरकारी नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को कुराश और अन्य खेलों में नकली सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे थे। उन्होंने कहा, 'शिकायत मिलने के बाद हमने जांच शुरू की। आरटीआई एप्लीकेशन के जरिए मिले दस्तावेजों की भी जांच की गई। हमें कई गड़बड़ियां मिलीं।'
जांच में क्या पता चला?
अधिकारी ने बताया कि जांच में पता चला कि 2016 और 2019 के बीच हुई प्रतियोगिताएं ऐसी संस्थाओं की ओर से आयोजित की गई थीं जो 'इंडियन कुराश एसोसिएशन' से जुड़ी हुई नहीं थीं। साथ ही, सर्टिफिकेट पर मौजूद हस्ताक्षर कथित तौर पर स्कैन करके लगाए गए थे।
दोनों आरोपियों ने कैसे किया घोटला?
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने जिला-स्तरीय एसोसिएशन से 9-10 साल पुरानी तारीख वाले कथित भागीदारी पत्र (participation letters) हासिल किए, ताकि ऐसे रिकॉर्ड बनाए जा सकें जिनसे लगे कि 2016 और 2022 के बीच प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं।
अधिकारी ने बताया कि मिली गड़बड़ियों में ऐसे सर्टिफिकेट भी शामिल थे, जो कथित तौर पर 2016-17 में जारी किए गए थे, लेकिन उनमें जिले का नाम उस्मानाबाद के बजाय धाराशिव लिखा था, जबकि जिले का नाम 2023 में बदला गया था। इसी तरह, पुराने औरंगाबाद जिले के सर्टिफिकेट पर छत्रपति संभाजीनगर का नाम लिखा हुआ मिला। उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसे सर्टिफिकेट भी मिले जो महिलाओं की कैटेगरी के लिए थे, लेकिन उन पर पुरुषों के नाम लिखे थे। साथ ही, कई सर्टिफिकेट पर सीरियल नंबर भी नहीं थे।
यह रैकेट कब शुरू हुआ?
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह रैकेट 2016 के बाद शुरू हुआ और 1,000 से ज्यादा सर्टिफिकेट बांटे गए होंगे। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने लगभग 60 ऐसे लोगों की पहचान की है जिन्होंने कथित तौर पर अलग-अलग सरकारी विभागों में ऐसे सर्टिफिकेट जमा किए थे। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ यह संख्या बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस इस रैकेट के दायरे का पता लगाने के लिए दूसरे सबूत भी जुटा रही है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पुलिस विभाग के किसी कर्मचारी ने डुप्लीकेट या नकली सर्टिफिकेट हासिल किए हैं।