तमिलनाडु में फॉक्सकॉन के 15 हजार करोड़ रुपये के निवेश को लेकर विवाद गहराया है। राज्य सरकार का दावा है कि इस परियोजना से 14 हजार नौकरियां बनेंगी, जबकि कंपनी का कहना है कि यह नया निवेश नहीं है।
दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट मोबाइल निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन के 15,000 करोड़ रुपये के नए निवेश को लेकर तमिलनाडु में विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को यह साफ किया कि इतनी बड़ी परियोजना को लेकर बातचीत हुई थी और इससे 14 हजार नई नौकरियां पैदा होंगी। राज्य के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने एक दिन पहले ट्वीट कर इस निवेश की जानकारी दी थी। उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा ने कहा कि यह निवेश एक साल से चली आ रही चर्चाओं के बाद तय हुआ है। इसे नया निवेश न मानना गलत होगा। यह बयान उस वक्त आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फॉक्सकॉन ने इस निवेश को नया नहीं बताया है। कंपनी की कथित टिप्पणी ने राज्य सरकार के दावे पर सवाल खड़े कर दिए थे।
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नया निवेश नहीं मान रही फॉक्सकॉन
मंत्री के दफ्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फॉक्सकॉन इसे नया निवेश नहीं मान रही है क्योंकि इस परियोजना को लेकर बातचीत पिछले एक साल से जारी थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि ताइवान की यह इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज टैरिफ संबंधी चिंताओं के बीच एक अमेरिकी टेक कंपनी के दबाव में आकर सावधानीपूर्वक बयान दे रही है।
कंपनी के प्रतिनिधि की सीएम स्टालिन से मुलाकात हुई थी
विवाद तब शुरू हुआ जब फॉक्सकॉन इंडिया के प्रतिनिधि रॉबर्ट वू ने सोमवार को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री दोनों ने सोशल मीडिया पर इस बैठक को राज्य की बड़ी निवेश उपलब्धि बताते हुए पोस्ट किया। हालांकि, फॉक्सकॉन के बयान ने इस उपलब्धि को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। अब राज्य सरकार और कंपनी के बीच इस पर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं।
उद्योग मंत्री राजा ने कहा कि हम तमिलनाडु को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों के साथ हमारा सहयोग लंबी अवधि का है। इस विवाद के बीच यह भी साफ हो गया है कि फॉक्सकॉन की तमिलनाडु में उपस्थिति और विस्तार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन कंपनी इसे नया निवेश नहीं बल्कि पुरानी योजना का हिस्सा मान रही है।
राजनीतिक विवाद शुरू
हालांकि, फॉक्सकॉन की ओर से इस निवेश को नया न मानने की खबर के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा। पीएमके नेता डॉ. अंबुमनी रामदास ने इसे आधे दिन में उजागर हुई झूठ की झोली करार दिया और राज्य से निवेश पर सफाई-पत्र की मांग की। भाजपा प्रवक्ता नारायणन थिरुपथी ने इसे द्रविड़ीय झूठ और तमिलनाडु के लिए शर्मनाक कहा।