2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में करिश्माई जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने यूपी में सहयोगी दल के साथ 80 में से 73 जबकि बिहार में 40 में से 31 सीटें कब्जाई थीं। भाजपा के लिए पिछली बार जैसा करिश्मा कर पाने की उम्मीद कम है क्योंकि इस बार विपक्ष बिखरा हुआ नहीं है और भाजपा के पास पहले जैसे सहयोगी नहीं हैं।
छूट रहे साथी, विपक्ष का बिखराव कम
आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने पर नाराज तेलुगू देशम पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया। शिवसेना साथ छोड़ने की धमकी दे रही है। वहीं, विपक्ष का बिखराव कम हुआ है। लोकसभा उपचुनाव में यूपी, राजस्थान, पंजाब, बिहार में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में 2019 के चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पुराने सहयोगियों को गठबंधन में बांधे रखना होगा तो नए सहयोगी भी साथ लाने होंगे। यूपी में उनका मुकाबला बसपा-सपा के गठजोड़ से होगा। बिहार की विपक्षी पार्टियों में बात चल रही है। महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस गठजोड़ फिर तैयार है।
(1) एनडीए का गणित
वर्ष 2014: कुल 29 दल, 336 सीटें। इनमें से भाजपा की 282 सीटें।
2018: 40 दल, 12 नए दल शामिल, लेकिन 4 ने साथ छोड़ा। इस आधार पर कुल सीटें: 305, भाजपाः 272 सीट (9 उपचुनाव हारे, कैराना में हो रहा है उपचुनाव) (एमडीएमके, हरियाणा जनहित कांग्रेस और राजू शेट्टी भी एनडीए छोड़ गए। शिवसेना का लोकसभा चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़ने का एलान)
(2) महंगे पेट्रो उत्पादों से बढ़ेगी मुद्रास्फीति
सरकार की बड़ी उपलब्धि मुद्रास्फीति की दर को लगातार काबू में रखना है। लेकिन पेट्रोलियम के बढ़ते दामों और किसानों से किए गए फसल के ऊंचे दाम के वादे के साथ 2018-19 का साल ऊंची मुद्रास्फीति वाला रह सकता है।
महंगा पेट्रोल-डीजल...
Petrol-Diesel
2011: 118.64 डॉलर प्रति बैरल था क्रूड ऑयल (सबसे महंगा)। तब पेट्रोल 58.37 और डीजल 37.75 रुपये प्रति लीटर थे।
मई 2014: जब मोदी पीएम बने। 106.85 डॉलर प्रति बैरल क्रूड ऑयल। तब पेट्रोल 71.41 और डीजल 56.71 रुपये था।
वर्तमान में: 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास क्रूड ऑयल। पेट्रोल 77.83 और डीजल 68.75 रुपये।
पेट्रो पदार्थों पर टैक्स एवं सेस से केंद्र सरकार की कमाई
2014-15
1.06 लाख करोड़
2018-19
2.58 लाख करोड़ का लक्ष्य
(3) रोजगार कम...ऐसे अच्छे दिन कैसे
अच्छे दिन के वैसे तो कई मायने हो सकते हैं, लेकिन आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि उसे रोजगार मिले और आमदनी बढ़े। पर, मोदी के चार साल में रोजगार के अवसर ज्यादा नहीं बढ़े। दो बार सूखे से किसानों पर मार पड़ी। नोटबंदी और जीएसटी का भी रोजगार सृजन पर असर पड़ा।
बेरोजगारी दर: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार...
3.52% बेरोजगारी दर रही वर्ष 2017 में भारत में
3.75% पर पहुंच गई इस वर्ष की पहली तिमाही में
यह सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय है... हालांकि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में रोजगार के 1.5 करोड़ अवसर सृजित हुए।
(4) किसानों की कसक... सूखा और गिरते दाम
दो बार सूखा पड़ने और फसल के गिरते दामों के चलते किसानों में गुस्सा है। केंद्र ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने और एमएसपी भी लागत से डेढ़ गुना ज्यादा देने का वादा किया है, लेकिन स्थिति खरीफ की फसल आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
आय दोगुनी करनी हो तो...
4.5% बढ़ाना होगा उत्पादन
6 फीसदी था उत्पादन 2016-17 में, लेकिन 3 फीसदी रहने का अनुमान वर्ष 2017-18 में
न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करना है तो...17 फीसदी की वृद्धि वर्ष 2022 तक हर साल करनी होगी
दो वर्षों का न्यूनतम समर्थन मूल्य
वर्ष धान गेहूं बाजरा जौ
2014-15 1360 1450 1250 1100
2017-18 1550 1675 1425 1325
(5) ‘चौकीदार’ के सामने से भाग निकले भ्रष्टाचारी
भ्रष्टाचार के खिलाफ खुद को चौकीदार बताने वाले पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को तब चोट पहुंची, जब पीएनबी में घोटाला सामने आया और नीरव मोदी देश छोड़कर भाग निकला। जनता में भरोसा जगाने के लिए मोदी सरकार को नीरव मोदी, मेहुल चोकसी या विजय माल्या में से किसी को वापस लाना होगा।
13,000 करोड़ रुपये फंसे हैं नीरव मोदी-मेहुल चोकसी के घोटाले में
सरकार की कोशिश
BJP
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ऐसे सभी बैंक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहा है, जिनके नाम जांच एजेंसी की रिपोर्ट में आए हों। बैंको से जुड़े मामलों की जांच में तेजी लाई जा रही है। माल्या के मामले में ब्रिटिश कोर्ट ने भी सरकार के हक में फैसला दिया है, जिससे बैंक माल्या की ब्रिटिश संपत्ति बेच पाएंगे।
(6) बैंकों का संकट: 10 लाख करोड़ कर्ज
बैंकों का फंसा हुआ कर्ज बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के जरिए इसमें से कुछ राशि को वापस लाया जा सकता है, लेकिन यह भी 2018-19 में धीमे-धीमे आनी शुरू होगी। साफ है, बैंक फिलहाल कुछ वक्त तक ज्यादा कर्ज नहीं दे सकेंगे। इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में देरी होगी। ब्लूमबर्ग के मुताबिक इस समय सभी बैंकों के पास करीब 14 लाख करोड़ रुपये का स्ट्रेस्ड असेट है, जो बिकने के लिए तैयार है।
3.4% बैंकों का एनपीए था मार्च 2013 में कुल कर्ज के मुकाबले
9.9%हो गया है एनपीए मार्च 2017 में
(7) सरकारी खर्च...चिंता का सबब
आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए सरकारी खर्च, निजी निवेश, निर्यात और निजी खपत चार इंजन हैं। इनमें से सिर्फ दो सरकारी खर्च और निजी खपत ही काम कर रहे हैं। निजी निवेश बैंक क्रेडिट ग्रोथ पर निर्भर है और निर्यात की निर्भरता व्यापार के लिए वैश्विक परिस्थितियों पर टिकी है। यदि वर्तमान हालात देखें तो ये दोनों ही परेशानी की स्थिति में हैं।
केंद्र सरकार का खर्च
2016-17: 23.13 लाख करोड़
2017-18: 26.94 लाख करोड़
2018-19 : 29.20
(8) ‘आयुष्मान’: फिटनेस चैलेंज
आयुष्मान भारत योजना में 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को 5 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा कवर मिलेगा, यानी आधा देश इसके दायरे में आ जाएगा। इसे 15 अगस्त से देशभर में लागू करने की कोशिश है। पर, दिक्कत यह है कि इस गेमचेंजर योजना के प्रीमियम को लेकर रस्साकसी चल रही है। सरकार 1000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रीमियम देना चाहती है तो कंपनियां 2500 रुपये मांग रही हैं। इसलिए, सरकार ने पहले चरण के लिए जो केवल 10,000 करोड़ रुपये का बजट रखा था, उसे बढ़ाना पड़ेगा। भाजपा को लगता है कि यह उसके लिए वैसी ही गेमचेंजर स्कीम साबित होगी जैसी मनरेगा 2009 में कांग्रेस के लिए हुई थी।
(9) आदर्श गांव: अधूरा संकल्प
पीएम मोदी ने गांवों के विकास के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की थी। अपेक्षा की थी कि हर सांसद हर वित्तीय वर्ष में एक गांव गोद लेकर उसका विकास करेगा। दूसरे दलों को छोड़ दें तो भी तीसरे चरण में भाजपा के 272 में से सिर्फ 156 सांसदों ने ही गांव गोद लिए। जो गांव गोद लिए भी हैं, उनके विकास के लिए काम की दिशा व प्रगति बहुत उत्साहजनक नहीं है।
(10) निर्मल गंगा...आखिर कब
भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनाव में गंगा की निर्मलता और अविरलता को बड़ा मुद्दा बनाया था। मोदी सरकार ने 2016 में 20 हजार करोड़ रुपये की पांच साल की योजना बनाई। पर, सुस्ती इतनी कि सरकार पर सवाल उठने लगे। सुप्रीम कोर्ट तक को सख्त टिप्पणी करनी पड़ी। वैसे तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मार्च 2019 तक 70-80 प्रतिशत गंगा के निर्मल हो जाने का दावा किया है। ऐसा न हुआ तो भाजपा को गंगा पर भी सवालों का सामना करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार का दावा है...
80% तक साफ हो जाएगी गंगा नदी मार्च 2019 तक
(11) सैनिकों की शहादत सुरक्षा...कई सवाल
सैनिकों, सैन्य व अर्ध सैन्य बलों के कैंपों पर लगातार बढ़ते हमले, शहीद हो रहे सैनिकों की संख्या में लगातार वृद्धि, कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में बढ़ोतरी के साथ छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना में नक्सलियों के आए दिन सुरक्षा बलों पर हमले सरकार की बड़ी चुनौती हैं। अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला और पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले भी सरकार की सुरक्षा नीति के लिए सवाल बने हैं।
(12) चीन से चौकन्ना रहने की जरूरत
चीन से रिश्ते संतुलित रखने होंगे। भारत को पिछली घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग सितंबर 2014 में भारत आए। गुजरात में मोदी ने खूब आवभगत की। उसी दौरान चीनी सैनिकों ने सीमा में घुसपैठ कर अपने इरादे दिखा दिए। अगले साल मोदी चीन गए। उसके तुरंत बाद चीन ने दोकलम पर कब्जा जमा लिया। बड़ी मुश्किल से उसके सैनिक पीछे हटे। चीन ने भारत के सुरक्षा परिषद की सीट देने के खिलाफ वीटो लगा रखा है। पाकिस्तान में आतंकियों को शरण मिलने के बावजूद उसे हथियार से लेकर आर्थिक मदद भी दे रहा है। दक्षिण चीन सागर में प्रभुत्व से लेकर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर से होकर वन बेल्ट, वन रोड निकालने जैसे कई मामले पर अभी धुंधलका नहीं छंटा है।
ये भी चुनौतियां कम नहीं
आर जगन्नाथन
भूमि अधिग्रहण कानून: भूमि अधिग्रहण कानून की प्रक्रिया को सरल बनाने के मकसद से मोदी सरकार ने दो विधेयक पेश किए। तीन अध्यादेश जारी किए। तर्क था कि कांग्रेस सरकार में बनाए गए कानून के प्रावधान विकास कार्य रोकते हैं। पर, मोदी सरकार इस पर सहमति न बना पाई और पुराने कानून को ही बनाए रखना पड़ा। न्यायाधीशों का मोर्चा: सरकार और मंत्रिमंडल में मोदी ने चयन की छाप छोड़ी लेकिन जजों के चयन को लेकर चकचक होती रही। कई मुद्दों पर सरकार भी निशाने पर रही।
कब लौटेंगे कश्मीरी पंडित: कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस को कोसने वाली भाजपा सरकार 4 साल में कश्मीर की स्थिति और कश्मीरी पंडितों की घर वापसी न करा पाने को लेकर सवालों के घेरे में है।
एच-1 बी वीजा: अमेरिकी सरकार के एच-1 बी वीजा पर तेवरों ने भी भारत की समस्या बढ़ाई है। सवाल उठ रहे हैं कि ट्रंप से इतने अच्छे रिश्ते होने के बावजूद प्रधानमंत्री भारतीयों के लिए सबसे ज्यादा समस्या पैदा करने वाले इस निर्णय पर क्या कर रहे हैं। विकास का फल गरीबों में भी सबसे गरीब तक पहुंचा है। ग्राम स्वराज अभियान के जरिए लाखों लोगों को सीधा लाभ पहुंचाया गया। यही अंबेडकर को हमारी श्रद्धांजलि है। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘विराट’ चुनौतियां स्वीकार करना पसंद है। चाहे वह अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी हों या व्यक्तिगत तौर पर दी गई हों। कार्य क्षेत्र की चुनौतियों के बदले में मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में गिनाने को कई उपलब्धियां हैं। सीमाओं पर सख्ती... दुनिया में भारत की भूमिका सशक्त... आतंकवाद के खिलाफ विश्वभर में समर्थन... नोटबंदी और जीएसटी जैसे मजबूत फैसले हुए... पर, यह भी हकीकत ही है कि सेना के कैंपों पर लगातार हमले बढ़े। सैनिकों की शहादत बढ़ी। पड़ोसी देशों से रिश्ते सहज नहीं रहे। बैंक घोटाले हुए।
बैंकिंग फ्रॉड करने वाले देश से भागने में कामयाब रहे। महंगाई काबू करने और युवाओं को रोजगार देने के दावे के साथ सरकार आई। पर, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें भी सवाल खड़ी करती हैं। रोजगार के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी कहते हैं। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया गया। पर, हकीकत यह है कि उपज की गिरती कीमतों से किसान परेशान हैं। भले ही सरकार की साख पर कोई बड़ा दाग नहीं लगा, लेकिन सवाल साख से बड़े हो चले हैं।
आर जगन्नाथन- संपादकीय निदेशक, ‘स्वराज्य’ के साथ विशेषज्ञ एवं टीम अमर उजाला