सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति की उस रिपोर्ट पर संतुष्टि जताई, जिसमें कहा गया कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खात्मे के बाद किसी भी नाबालिग को जेल में हिरासत में नहीं रखा गया।
कोर्ट ने शुक्रवार को रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि हाईकोर्ट के चार जजों ने जम्मू-कश्मीर की सभी जेलों का दौरा किया और स्पष्ट रूप से लिखा कि किसी भी नाबालिग को गैरकानूनी तरीके से नजरबंद नहीं किया गया।
जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने ही जजों पर अविश्वास करना ठीक नहीं होगा। पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब याचिकाकर्ता एनाक्षी गांगुली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए समय दिए जाने पर जोर दिया।
पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को नाबालिगों की कथित नजरबंदी को लेकर कोई शिकायत है तो वह उचित मंच पर जा सकते हैं। कोर्ट ने पांच नवंबर को समिति को नाबालिगों को हिरासत में लिए जाने के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया था।
समिति ने पाया कि जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने 25 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में आरोपों से इनकार किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य में 144 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 142 को छोड़ दिया गया। बाकी दो को बाल सुधार गृह भेज दिया गया था।