आधी हो गई गोयल की हिस्सेदारी
चेयरमैन पद छोड़ने के साथ ही जेट एयरवेज में नरेश गोयल की हिस्सेदारी घटकर आधी रह गई। पहले कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 51 फीसदी थी, जो अब 25.5 फीसदी पर आ गई है। उन्हें कर्ज को परिवर्तित कराने के लिए 11.4 करोड़ इक्विटी शेयर कर्जदाताओं को देने पड़े। इसके बदले बैंकों ने कंपनी को तत्काल प्रभाव से 1,500 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है। कंपनी की साझेदार एतिहाद एयरवेज के पास अब भी 24 फीसदी हिस्सेदारी है।
कर्ज के बोझ ने आसमान से उतारा
करीब ढाई दशक पहले पत्नी अनीता के साथ जेट एयरवेज की नींव रखने वाले नरेश गोयल ने इसे देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइंस बनाया लेकिन कर्ज के बढ़ते बोझ ने उसकी उड़ान थाम ली। कंपनी पर केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडीकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और इलाहाबाद बैंक सहित कुछ विदेशी बैंकों के 8,000 करोड़ का कर्ज चढ़ गया और लीज का किराया न चुकाने से विमान खड़े कर लिए गए। लगातार ऋण भुगतान चूक से कंपनी आईबीसी के तहत आने को मजबूर हो गई।