वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ
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चंडीगढ़ स्थित इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के 12वीं विंग एयरफोर्स स्टेशन में आज एक कार्यक्रम में चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर की पहली यूनिट को शामिल कर लिया गया। कार्यक्रम में आईएएफ चीफ एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ भी शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, चिनुक हेलीकॉप्टर का प्रयोग मुख्यत: ट्रूप्स और जरूरी सैन्य सामान को ट्रांसपोर्ट करने के लिए किया जाता है।
भारतीय नौसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि चिनूक हेलीकॉप्टर सिर्फ दिन में नहीं, रात के वक्त भी सैन्य ऑपरेशन कर सकता है। दिनजान (असम) में पूर्वी भारत के लिए एक और यूनिट गठित की जाएगी। चिनूक का शामिल होना भी उसी तरह गेम चेंजर साबित होगा, जैसे लड़ाकू विमानों की फ्लीट में राफेल का शामिल होना होगा।
उन्होंने इस मौके पर कहा, 'इस समय देश के सामने सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां हैं और मुश्किल जगहों के लिए इस तरह की क्षमता वाले हेलीकॉप्टर की जरूरत है।' उन्होंने बताया कि चिनूक को भारत की जरूरतों के लिहाज से तैयार किया गया है और यह एक राष्ट्रीय संपत्ति है।
बयान में कहा गया है कि सीएच-47एफ (आई) चिनूक उन्नत बहुद्देशीय हेलिकॉप्टर है जो भारतीय सशस्त्र बलों को युद्ध और मानवीय मिशन के दौरान अतुलनीय रणनीतिक एयरलिफ्ट की क्षमता मुहैया कराता है।
अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोईंग (boeing chinook) ने बीते 10 फरवरी को भारतीय वायुसेना के लिए चार चिनूक सैन्य हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति गुजरात में मुंद्रा बंदरगाह पर की। कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि सीएच 47एफ (आई) चिनूक को चंडीगढ़ ले जाया गया
बता दें कि इसमें पूरी तरह एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम है। इसके अलावा इसमें कामन एविएशन आर्किटेक्चर कॉकपिट और एडवांस्ड कॉकपिट प्रबंध विशेषताएं हैं। इस हेलीकॉप्टर का दुनिया के कई भिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में काफी क्षमता से संचालन होता रहा है। चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना के अलावा कई देशों की सेनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। खासकर भारतीय क्षेत्र में इस हेलीकॉप्टर की विशेष उपयोगिता होगी। वियतनाम युद्ध, लीबिया, ईरान, अफगानिस्तान समेत इराक में यह हेलीकॉप्टर बड़ी और निर्णायक भूमिका निभा चुका है।
चिनूक हेलिकॉप्टर को अमेरिकी वायुसेना 1962 से ही इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने अब तक कुल 1179 चिनूक हेलिकॉप्टर बनाए हैं। बोइंग CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर डबल इंजन वाला है, इसकी शुरुआत 1957 में हुई थी। 1962 में इसको सेना में शामिल कर लिया गया। इसे बोइंग रोटरक्राफ्ट सिस्टम ने बनाया है।
इसका नाम अमेरिकी मूल-निवासी चिनूक से लिया गया है। इसकी शुरुआत से लेकर अब तक कंपनी ने इसमें समय के साथ कुछ बदलाव भी किए हैं। इसके कॉकपिट में बदलाव के साथ-साथ इसके रोटर ब्लैड, एंडवांस्ड फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम समेत कई दूसरे बदलाव कर इसके वजन को कम किया गया। वर्तमान में यह अमेरिका का सबसे तेज हेलीकॉप्टर में से एक है।
फरवरी 2007 में पहली बार नीदरलैंड इस हेलीकॉप्टर का पहला विदेशी खरीददार बना था। उसने CH-47F के 17 हेलीकॉप्टर खरीदे थे। इसके बाद 2009 में कनाडा ने CH-47F के 15 अपग्रेड वर्जन हेलीकॉप्टर खरीदे थे। दिसंबर 2009 में ब्रिटेन ने भी इस हेलीकॉप्टर में अपनी रुचि दिखाई और 24 हेलीकॉप्टर खरीदे।
2010 में आस्ट्रेलिया ने पहले सात और फिर तीन CH-47D हेलीकॉप्टर खरीदे थे। 2016 में सिंगापुर ने 15 हेलीकॉप्टर का ऑर्डर कंपनी को दिया था। हालांकि 1994 से ही सिंगापुर के पास चिनूक हेलीकॉप्टर थे, जिसको CH-47D से बदल दिया गया था। अब तक कुल 26 देशों के पास ये हेलीकॉप्टर मौजूद है।
इतना ही नहीं शुरुआत से लेकर अब तक कंपनी इसके करीब 15 वेरिएंट उतार चुकी है। इसमें HC-1B, CH-47A, ACH-47A, CH-47B, CH-47C, CH-47D, MH-47D, MH-47E, CH-47F, MH-47G, CH-47J, HH-47 शामिल हैं।
MH सीरिज के हेलीकॉप्टर CH सीरिज से काफी अलग हैं। इन्हें स्पेशल ऑपरेशन में शामिल किया जाता है। इसके अलावा MH सीरिज के हेलीकॉप्टर हवा में तेल लेने की क्षमता रखते हैं। इनको खासतौर पर स्पेशल फोर्सेस के लिए ही तैयार किया गया है।
सीएच-47 चिनूक एक एडवांस्ड मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय वायुसेना (indian air force) को बेजोड़ सामरिक महत्व की हैवी लिफ्ट क्षमता प्रदान करेगा। यह मानवीय सहायता और लड़ाकू भूमिका में काम आएगा। ऊंचाई वाले इलाकों में भारी वजन के सैनिक साजोसामान के परिवहन में इस हेलीकॉप्टर की अहम भूमिका होगी। भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब तक रूसी मूल के भारी वजन उठाने वाले हेलीकॉप्टर ही रहे हैं, लेकिन पहली बार वायुसेना को अमेरिका निर्मित हेलीकॉप्टर मिलेंगे।
भारतीय वायुसेना ने 15 चिनूक हेलीकॉप्टर को हासिल करने का आर्डर दिया था जिसमें से पहला चिनूक हेलीकॉप्टर इस साल फरवरी में आया था। सितंबर 2015 में भारत के बोइंग और अमेरिकी सरकार के बीच 15 चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदने का करार किया गया था। अगस्त 2017 में रक्षा मंत्रालय ने फैसला लेते हुए भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग से 4168 करोड़ रुपये की लागत से छह अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, 15 चिनूक भारी मालवाहक हेलीकॉप्टर अन्य हथियार प्रणाली खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान की थी।