ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) या राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरण योजना (आरजीजीएलवी) के तहत यदि वितरक बनाने का कोई आपको झांसा दे रहा है, तो आप सतर्क हो जाइए क्योंकि यह शुद्ध रूप से फर्जीवाड़ा है। पता चला है कि मुंबई के पते के सहारे कई फर्जी वेबसाइटों के जरिए यह खेल चल रहा है, जिसमें सरकारी तेल विपणन कंपनियों के नाम पर नकली ई-मेल भेजकर लोगों से भारी मात्रा में धन की मांग कर रहे है।
देश में सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक उज्ज्वलाडीलर डॉट कॉम, एलपीजीवितरकचयन डॉट ओआरजी, उज्ज्वलाएलपीजीवितरक डॉट ओआरजी और इंडेनएलपीजी डॉटकॉम के नाम से कई वेबसाइटें चलने की सूचना मिली थी। कई धोखेबाज एजेंसियां या व्यक्ति पीएमयूवाई या आरजीजीएलवी के अंतर्गत एलपीजी वितरकों की नियुक्ति का झांसा देते थे। उल्लेखनीय है कि सरकारी कंपनियों ने एलपीजी वितरकों की नियुक्ति के लिए जो वेबसाइट बनाई है, उसका पता एलपीजीवितरकचयन डॉट इन है। फर्जीवाड़े के लिए इसी से मिलता-जुलता नाम रखा गया है, ताकि लोग झांसे में आ जाएं।
उन्होंने बताया कि नकली वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर उनका पंजीकृत कार्यालय उज्ज्वलाआरजीजीएलवी योजना, उज्ज्वला अपार्टमेंट, एमजी रोड, कांदिवली, पश्चिम मुंबई, महाराष्ट्र, 400067 लिखा है। लोग आसानी से धोखा खा जाएं, इसके लिए आवेदकों को इंफो एट दि रेट उज्ज्वलाडीलर डॉट कॉम नामक ईमेल आईडी से ईमेल भेजे जा रहे हैं। ये आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के खुदरा एलपीजी वितरक बनाने के लिए भारी मात्रा में धन वसूल रहे हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए अलग से एलपीजी वितरक नहीं बनाए जाते। यह योजना उन्हीं वितरकों के जरिए लागू की जा रही है, जो कि सामान्य ग्राहकों को भी कनेक्शन या रीफिल बेचते हैं। ऐसे वितरकों के चयन के लिए एक स्थापित चयन प्रक्रिया है, जिसका विज्ञापन देश के प्रमुख समाचार पत्रों में आता है। इसके लिए लॉटरी ड्रॉ के जरिए आवेदकों का चयन होता है। इसके लिए किसी एजेंसी या व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की गई है। इंडियन ऑयल का कहना है कि यदि कोई इस तरह से गैस एजेंसी दिलाने का दावा करे तो तत्काल उसकी शिकायत पुलिस में की जानी चाहिए। कोई भी सरकारी तेल कंपनियां इस तरीके से वितरकों का चयन नहीं करती।