महिलाओं को बचाने के लिए ये उपाय करे सरकार
द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) में सीनियर रिसर्चर मीना सहगल ने अमर उजाला से कहा कि यह सच्चाई है कि महंगाई के कारण देश के अनेक गरीब वर्ग के उपभोक्ता एलपीजी गैस का कनेक्शन पाने के बाद भी उसकी रिफिलिंग नहीं करा रहे हैं। इसके लिए परिवारों की आर्थिक स्थिति ज्यादा जिम्मेदार है। लेकिन अगर सरकार ऐसे परिवारों को सौर ऊर्जा या इलेक्ट्रिक उपकरणों से भोजन बनाने की तरफ मोड़ सके, तो यह उन्हें प्रदूषण से बचाने का ज्यादा सस्ता और स्थाई उपाय हो सकता है।
मीना सहगल के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों और दूर-दराज के क्षेत्रों में सौर ऊर्जा उपकरण ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं। यह बहुत सस्ता भी पड़ता है। इलेक्ट्रिक माध्यम से केवल 1200 रुपये की एक प्लेट एक बार का निवेश मांगती है और इसके बाद सरकार परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी पर आधारित बिजली उपलब्ध करा सकती है।
इसी प्रकार सौर ऊर्जा के मामले में भी एक ही उपकरण में एक बार निवेश की आवश्यकता पड़ती है। अगर यही उपकरण परिवारों को मुफ्त या अच्छी सब्सिडी देकर उपलब्ध कराया जा सके, तो यह उन्हें प्रदूषण से बचाने का स्थाई समाधान हो सकता है। यह सबसे सस्ता और पूरी तरह प्रदूषण से मुक्त होगा।
हालांकि, तब तक लोगों को गैस की अनावश्यक खपत करने से बचना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कुछ उपाय परिवारों की गैस पर होने वाली खपत को काफी कम कर सकते हैं।