आरजी कर मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दरअसल टीएमसी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को पुलिस ने ओडिशा से गिरफ्तार किया है। निर्मल घोष पर आरजी कर मामले में कथित तौर पर सबूत मिटाने का आरोप है।
सीएम शुभेंदु ने दिए थे जांच तेज करने के निर्देश
बीती 9 अगस्त को ही सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया था कि पीड़िता के अंतिम संस्कार के मामले में नया केस दर्ज करें और फिर मामले की जांच करें। आरोप है कि पीड़िता का अंतिम संस्कार निर्मल घोष की मौजूदगी में ही पानीहाटी में जल्दबाजी में किया गया था।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़िता के अंतिम संस्कार की फीस माफ किए जाने, दस्तावेजों पर परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर न होने पर सवाल उठाए थे। सीएम ने निर्मल घोष, पीड़िता के पड़ोसी संजय मुखर्जी और काउंसलर सोमनाथ डे की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था।
पीड़िता के पिता की शिकायत में निर्मल घोष पर लगे ये आरोप
पीड़िता के पिता ने खारदाह पुलिस स्टेशन में जो एफआईआर दर्ज कराई थी, उसमें घोष और दो अन्य के नाम शामिल थे। पीड़िता के पिता ने अपने शिकायत में कहा कि अंतिम संस्कार जल्दबाजी में किया गया, जिससे सबूत इकट्ठा करने और दूसरी ऑटोप्सी की संभावना खत्म हो गई। आरजी कर मामले की जांच फिलहाल सीबीआई द्वारा की जा रही है। अब सीएम के निर्देश पर सबूत मिटाने के मामले में नया मामला दर्ज किया गया, जिसकी जांच बंगाल पुलिस द्वारा की जा रही है।
9 अगस्त 2024 को घटी थी घटना
31 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार रूम में मृत पाई गई थी। जांच में पता चला कि पीड़िता की दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या की गई। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के शव को जल्दबाजी में पानीहाटी में अंतिम संस्कार किया गया। जांच में पता चला कि दो शवों का अंतिम संस्कार पहले होना था, लेकिन उन्हें रोककर पीड़िता का अंतिम संस्कार पहले और जल्दबाजी में किया गया। अंतिम संस्कार के दस्तावेजों में भी पीड़िता के पड़ोसी के हस्ताक्षर हैं न कि उसके परिजनों के। आरजी कर मामले में एक आरोपी को दोषी पाया गया है। इस मामले की चर्चा देशभर में हुई थी और देशभर में डॉक्टरों ने पीड़िता के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया था।