केंद्र सरकार के आरोग्य सेतु एप पर सवालिया निशान लगाने वालों में अब सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज भी शामिल हो गए हैं। जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण ने मंगलवार को इस एप से डाटा चोरी की संभावना जताई और कहा कि ये एप एक तरीके का पैचवर्क है, जो लोगों को लाभ पहुंचाने के बजाय उनके लिए ज्यादा चिंता का कारण बनेगी। उन्होंने इस एप को अनिवार्य करना पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है।
जस्टिस श्रीकृष्ण ने यह सवाल उस समय उठाया है, जब सरकार ने सभी कर्मचारियों के इस एप को मोबाइल में डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है। जस्टिस श्रीकृष्ण डाटा प्रोटेक्शन बिल का पहला ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी के प्रमुख रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि किस कानून के तहत इस एप को अनिवार्य किया गया है, क्योंकि अभी तक इसके लिए कोई कानून ही मौजूद नहीं है और इसे महज कार्यकारी आदेश के जरिए लागू कर दिया गया है। बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए संदिग्ध स्वास्थ्य वाले लोगों की ऑनलाइन कांटेक्ट ट्रेसिंग योजना के तहत केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु एप को लांच किया था।
आरोग्य सेतु एप से निजता का हनन नहीं, अधिकतम 60 दिन तक रखा जाएगा डेटा
नोएडा पुलिस का आदेश भी अवैध
जस्टिस श्रीकृष्ण ने नोएडा पुलिस के उस आदेश को भी अवैध बताया, जिसमें मोबाइल फोन के अंदर आरोग्य सेतु एप नहीं पाए जाने को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है और इसके लिए छह महीने कैद या एक हजार रुपये जुर्माने की व्यवस्था की गई है। जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है और ऐसे आदेशों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।