दरअसल, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इमकार शाह की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सॉलिसिटर जनरल व वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टालने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को टालने को इच्छुक थी। इसी दौरान, दूसरे पक्ष के वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने सुनवाई टालने के विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को 'अश्वत्थामा हतो' की तरह पूरा सच जानने का अधिकार है, इसलिए मैं केवल पूरी तस्वीर पेश कर रहा हूं।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि जिस तरह वह रोजाना प्रेस को गुमराह करते हैं, उसी तरह से न्यायालय को गुमराह न करें।
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दरअसल, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इमकार शाह की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व सॉलिसिटर जनरल व वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टालने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को टालने को इच्छुक थी। इसी दौरान, दूसरे पक्ष के वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने सुनवाई टालने के विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को 'अश्वत्थामा हतो' की तरह पूरा सच जानने का अधिकार है, इसलिए मैं केवल पूरी तस्वीर पेश कर रहा हूं।
इस पर वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने सिंघवी से कहा कि आप भ्रामक बयानबाजी न करें, जैसा आप रोजाना प्रेस के समक्ष करते हैं। आप हर समय यही करते हैं। कुमार के इस बयान पर जस्टिस शाह ने भी एतराज जताया। जस्टिस शाह ने कुमार से कहा, ''हमें प्रेस से कोई सरोकार नहीं है। बाहरी चीजों को कोर्ट में न लाएं।''
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जवाब में कुमार ने कहा कि सिंघवी जानबूझकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। इस पर डॉ सिंघवी ने कहा कि यदि वरिष्ठ वकील कुमार के व्यक्तिगत दुर्व्यवहार से राहत मिलती है तो उन्जें राहत प्रदान किया जाए। मुझे बहुत ख़ुशी होगी। इसके बाद पीठ ने सुनवाई को दो हफ्ते को टालते हुए दो वरिष्ठ वकीलों के बीच हो रही नोक-झोंक को विराम दिया।