पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार 26 दिसंबर को नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें आधुनिक भारत के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई का भी समर्थन किया। उनके नेतृत्व में भारत ने जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) की शुरू की। इसके अलावा अदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) पारित किया गया और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्थापना की थी।
मनमोहन सिंह की सरकार ने पारित किया वन अधिकार अधिनियम
लंबे समय तक आदिवासी समुदायों को अपनी भूमि को लेकर निर्णय लेने से वंचित रखा गया था। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-1 सरकार ने इसे बदल दिया। उनकी सरकार ने 2006 में वन अधिकार अधिनियम पारित किया। इसके तहत उन्होंने वनों का नियंत्रण उन लोगों को सौंप दिया जो वहां रहते थे।
जुलाई 2008 में मनमोहन सिंह ने सभी मुख्यमंत्रियों से आदिवासियों को वन भूमि पर उनका अधिकार वापस दिलाने के लिए तेजी से काम करने की अपील की थी। एक चिट्ठी में उन्होंने कहा, यह मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। वे यह सुनिश्चित करें कि हमारे देश के एक बहुत ही कमजोर वर्ग को अपना मूल अधिकार मिले। इसी साल मनमोहन सिंह की सरकार ने ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए आठ स्तरीय रणनीति एनएपीसीसी पेश की। बता दें कि एनएपीसीसीके आठ मुख्य मिशनों में राष्ट्रीय सौर मिशन भी शामिल हैं।
2010 में की थी एनजीटी की स्थापना
मनमोहन सिंह ने 2009 में कोपेनहेगन जलवायु सम्मेलन में भाग लिया। उनके नेतृत्व में भारत ने पर्यावरणीय न्याय में तेजी लाने के लिए 2010 में एनजीटी की स्थापना की। बहुत जल्द ही एनजीटी वनों की कटाई और वन्यजीव संरक्षण और प्रदुषण जैसे मामलों पर तुरंत निर्णय लेने वाली संस्था बन गई। बता दें कि मनमोहन सिंह ने 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक भारत का नेतृत्व किया। इससे पहले उन्होंने 1991 से 1996 के बीच भारत के वित्त मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
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