पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को एक बार फिर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि भारतीय उदार लोकतंत्र की संस्थाओं को मजबूत करने और खुद को संविधान की रक्षा में शामिल किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने यहां कहा, हाल ही में युवाओं ने देश को याद दिलाया कि देश की आजादी प्रबुद्ध नागरिकों के हाथ में ही सुरक्षित है। यह भी तभी होगा, जब यह (आजादी) सभी के लिए समान हो। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार की किताब ‘ह्यूमन डिग्निटी- अ परपज इन परपेच्युटी’ के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए दो बार के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि जब मौलिक स्वतंत्रता खतरे में थी, तो हमारे उदार व उन्मुक्त लोकतंत्र की संस्थाओं की कई मौकों पर परीक्षा ली गई।
उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का विकास सालों में हुआ है और इन्हें मजबूत करने व संविधान के बचाव में खुद को खड़ा करने की जरूरत है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वास्तव में आजादी का विचार हमारे लोगों के जीवन में तभी आकार ले सकता है, जब कानून के तहत वे सभी समान नागरिक की तरह जीएं।
पूर्व प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सीएए के खिलाफ चल रहे देशव्यापी गतिरोध और केरल सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में इसे रद्द करने के लिए याचिका लगाए जाने के बीच आई है।