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Politics: चव्हाण बोले- मेरा बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया; ऑपरेशन महादेव और मालेगांव मामले पर की थी टिप्पणी

Sun, 03 Aug 2025 12:47 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कराड

सार

ऑपरेशन महादेव और मालेगांव बम विस्फोट मामले पर हाल ही में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने टिप्पणी की थी, जिसे लेकर शिवसेना ने उनके इस बयान को लेकर विरोध किया था। इस पर चव्हाण ने कहा कि कुछ लोगों ने जानबूझकर उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया, ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। 
 
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कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण की विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते शिवसेना कार्यकर्ता - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने शनिवार को कहा कि उनके हाल ही में दिए गए बयान 'आतंकवाद का कोई जाति, धर्म या रंग नहीं होता' को कुछ लोगों ने जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया है ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।

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वह यह बात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहे थे। दरअसल, शिवसेना ने उनके इस बयान का विरोध किया था। यह विरोध उस समय हुआ जब 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में सात आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था।

सभी को विरोध करने का अधिकार
कांग्रेस नेता चव्हाण ने कहा कि सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन असली मुद्दे को समझना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एक केंद्रीय एजेंसी है। 2008 के विस्फोट मामले की जांच 2014 से चल रही है। अदालत ने फैसला दिया है कि विस्फोट हुआ था, लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव में अपराधियों की पहचान नहीं की।
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राजनीतिक विवाद पैदा करने के लिए बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया
चव्हाण ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, ताकि मूल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके और राजनीतिक विवाद पैदा हो सके। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, फिर भी इसका इस्तेमाल राजनीति करने के लिए किया गया। चव्हाण ने 2008 के मालेगांव विस्फोट के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने में सरकार की विफलता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'यह एक गंभीर आतंकी कृत्य था। निर्दोष लोगों की जान गई। अगर ठोस सबूत हैं, तो सजा मिलनी चाहिए। अगर नहीं, तो व्यवस्था न्याय देने में क्यों विफल हो रही है?'

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वर्षों की जांच के बावजूद भी असली अपराधी अज्ञात
चव्हाण ने आगे कहा कि इस मामले की शुरुआत में महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने जांच की थी, जिसे बाद में एनआईए को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्षों की जांच के बावजूद, असली अपराधी अभी तक अज्ञात हैं। यह जांच करने की जरूरत है कि क्या राजनीतिक दबाव ने जांच को प्रभावित किया था। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना की। साथ ही कहा कि महाराष्ट्र में औद्योगिक निवेश घट रहा है। बीड में, दो करोड़ रुपये न चुका पाने पर जबरन वसूली से जुड़ी एक हत्या हुई। पुणे में भी, उद्योगों को जबरन वसूली की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजनीतिक संरक्षण में जबरन वसूली की गतिविधियां फल-फूल रहीं
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राजनीतिक संरक्षण में जबरन वसूली की गतिविधियां फल-फूल रही हैं। उन्होंने कहा कि केवल मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री ही ऐसे तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी गैंगस्टर तब तक निडर होकर काम नहीं कर सकता है, जब तक कि उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त न हो। 

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वह 'भगवा आतंक' जैसे शब्दों के इस्तेमाल के खिलाफ 
बृहस्पतिवार को मालेगांव विस्फोट मामले में आए फैसले पर चव्हाण ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह 'भगवा आतंक' जैसे शब्दों के इस्तेमाल के खिलाफ हैं, क्योंकि भगवा रंग छत्रपति शिवाजी महाराज के झंडे और वारकरी परंपरा से जुड़ा है। जहां भाजपा और दक्षिणपंथी संगठन इस फैसले के बाद कांग्रेस पर 'भगवा आतंकवाद' शब्द गढ़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं चव्हाण ने फिर दोहराया कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, चाहे वो किसी भी समुदाय से हों। जो निर्दोषों की हत्या करता है, वह आतंकवादी होता है।

चव्हाण ने पूछा- गांधी को मारने वाले गोडसे किस धर्म से थे
मालेगांव विस्फोट और उसके बाद के मुकदमे में 'हिंदू आतंकवाद' शब्द के इस्तेमाल पर चव्हाण ने पूछा था कि अभियुक्त किस धर्म के थे। उन्होंने सवाल किया, 'आतंकवाद का पहला कृत्य महात्मा गांधी की हत्या थी। महात्मा गांधी को मारने वाले नाथूराम गोडसे किस धर्म से थे?'
 

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