इन दिनों कॉलेजियम प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच काफी खींचतान चल रही है। इस मामले पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर एस सोढ़ी ने सोमवार को अपनी बात रखी, उन्होंने कहा कि समाधान निकालने के लिए दोनों संस्थानों के बीच परिपक्व बहस होनी चाहिए।
कॉलेजियम प्रणाली के जरिये न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले पर पूर्व जज सोढ़ी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को हाईजैक कर लिया है, वहीं उनके इस बयान का हवाला देते हुए, केंद्रीय कानून मंत्री ने आरएस सोढ़ी के इस बयान को शेयर किया था। इसी के बाद रिटायर्ड जज ने नसीहत दी कि सरकार और न्यायपालिका के बीच ऐसी इस तरह की बहसबाजी ठीक नहीं।
उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल मनमाना है। मुझे नियुक्ति में इस तरह की मनमानी का कोई आधार नहीं दिखता। आप आपस में बैठें और एक व्यवस्था के तहत बहस करें कि आप वहां क्या चाहते हैं और क्या नहीं। आगे कहा कि दोनों निकाय (न्यायपालिका और कार्यपालिका) परिपक्व निकाय हैं और इस तरह का झगड़ा दोनों को शोभा नहीं देता।
पूर्व जज सोढ़ी ने कहा कि दोनों के बीच परिपक्व बहस होनी चाहिए। एक साथ बैठें और एक समाधान के साथ आएं। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर मेरे जैसा कोई बयान देता है, तो आप उसके कंधे पर रखकर गोली चला देते हैं। क्या यह बहस है? परिपक्वता दिखाओ और समाधान ढूंढो।
रविवार को कानून मंत्री रिजिजू ने जज सोढ़ी के एक साक्षात्कार का वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया था कि "वास्तव में अधिकांश लोगों के समान विचार हैं। यह केवल वे लोग हैं जो संविधान के प्रावधानों की अवहेलना करते हैं और यह जनादेश देते हैं कि लोग सोचते हैं कि वे भारत के संविधान से ऊपर हैं।" इसके बाद रिजिजू ने फिर से ट्वीट कर कहा कि राज्य के तीनों अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - को राष्ट्र के व्यापक हित में मिलकर काम करना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक प्रमुख संघर्ष बिंदु बन गई है।