मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस के जांच अधिकारी का तबादला करने के मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम डायरेक्टर एम नागेश्वर राव ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के जवाब में उन्होंने सोमवार को एफिडेविट दायर किया। मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी।
उन्होंने कहा, "मुझे अपनी गलती का अहसास है। बिना शर्त माफी मांगते हुए मैं कहना चाहता हूं कि मैंने जानबूझकर कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया। मैं तो सपने में भी ऐसा नहीं सोच सकता।' उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद जांच अधिकारी के तबादले पर 7 फरवरी को कोर्ट ने नागेश्वर राव को फटकारते हुए कहा था कि अब उन्हें भगवान ही बचा सकता है।
हलफनामे में नागेश्वर राव ने कहा कि वह अपनी गलती स्वीकार करते हैं। नागेश्वर राव की तरफ से दायर हलफनामे में लिखा है कि अदालत के आदेश के बिना मुख्य जांच अधिकारी को स्थानांतरित नहीं करना चाहिए, यह मेरी गलती है और मेरी माफी स्वीकार करें। मालूम हो कि पिछले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को तलब किया था। सुप्रीम कोर्ट ने राव को फटकार लगाई कि किस परिस्थिति में उन्होंने जांच अधिकारी का ट्रांसफर किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर एके शर्मा का तबादला करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस भेजा था। पिछले साल अक्तूबर में सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच उपजे विवाद के बाद तत्कालीन संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया था।