फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला ने कहा- किस आधार पर खारिज की गई शिकायत यह जानने का हक

Tue, 07 May 2019 11:28 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सीजेआई रंजन गोगोई (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिलाकर्मी ने इन-हाउस पैनल के अध्यक्ष जस्टिस एसए बोबडे को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट की प्रति मांगी है।

विज्ञापन


इन-हाउस कमेटी ने 5 मई को दाखिल रिपोर्ट में चीफ जस्टिस को क्लीन चिट दे दी थी। महिला ने अपने पत्र में कहा कि उसे यह जानने का हक है कि जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया है। किन गवाहों ने बयान दिए और पैनल के समक्ष क्या सबूत व तथ्य रखे गए। 

शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि चीफ जस्टिस को परोक्ष रूप से रिपोर्ट की प्रति दी  गई है। अत: वह भी रिपोर्ट की प्रति पाने की हकदार है। महिला का कहना है कि उनकी शिकायतों को पैनल ने सही नहीं पाया, ऐसे में उसे यह जानने का पूरा हक है कि आखिर किस आधार पर उनकी शिकायतों को नकार दिया गया।
विज्ञापन


जांच रिपोर्ट की प्रति न देना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल द्वारा इस संबंध में जारी प्रेस नोट में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि इन-हाउस पैनल की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

 

न्यायपालिका की प्रतिष्ठा खराब करने की कोशिश : बार काउंसिल

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मंगलवार को कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पीछे कुछ लोग हैं जो न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। काउंसिल ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के जज के साथ खड़ी है।

बार काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि महिला की शिकायत पर पैनल ने चीफ जस्टिस को क्लीन चिट दे दी है। लिहाजा बार के तमाम सदस्यों को यह मामला यहीं खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा है कि यह अफसोसजनक है कि बिना आधार के इस मामले को उठाया गया।
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा था, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की कोई बाध्यता नहीं है

सुप्रीम कोर्ट की इनहाउस जांच कमेटी ने सोमवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को यौन उत्पीड़न के आरोपों से क्लीन चिट दी थी। आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत भी खारिज कर दी गई है। कमेटी ने कहा कि कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी के आरोपों में दम नहीं है। 

महिला द्वारा जांच से हटने के बाद एकपक्षीय सुनवाई करके तैयार यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल ने एक संक्षिप्त नोटिस जारी कर कहा था कि इनहाउस कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की कोई बाध्यता नहीं है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें