बांग्लादेश में जिन ताकतों को खुली छूट मिली है। अब उनको यूनुस सरकार नियंत्रित नहीं कर पा रही पा रही है। बांग्लादेश में जारी अराजकता पर पूर्व भारतीय राजदूतों ने कहा कि वहां कट्टरपंथी तत्व हुए हावी है।
बांग्लादेश में उग्र प्रदर्शनों और हिंसा पर पूर्व भारतीय उच्चायुक्तों ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में शासन बेहद कमजोर हो चुका है और कट्टरपंथी तत्व स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। यह तनाव इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़का है। पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने कहा कि कमजोर प्रशासन के कारण इस्लामी और दक्षिणपंथी ताकतें सक्रिय हो गई हैं।
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पूर्व उच्चायुक्त रीवा गांगुली दास ने इन घटनाओं को चौंकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी सलाहकार भी भीड़ की हिंसा को सही ठहरा रहे हैं। रीवा गांगुली के अनुसार, यूनुस सरकार ने जिन ताकतों को खुली छूट दी, अब वह उन पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है।
भारतीय कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
पूर्व राजनयिकों ने भारतीय राजनयिक प्रतिष्ठानों पर हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने जोर दिया कि भारत के लिए बांग्लादेश में तैनात उच्चायुक्त और अन्य कर्मियों की सुरक्षा फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इसे अगले साल फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले एक बड़ी साजिश करार दिया है। फिलहाल ढाका में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
हिंदू युवक की हत्या पर थरूर और प्रियंका ने जताई चिंता
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या पर को असहनीय त्रासदी बताते हुए अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बांग्लादेश सरकार की आेर से हत्या की निंदा का स्वागत किया, पर सुरक्षा के उपायों पर सवाल भी उठाए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा का संज्ञान लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में धर्म के आधार पर हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है।