प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व विशेष निदेशक सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। उन्होंने नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप जैसे सबसे हाई-प्रोफाइल धन शोधन मामलों की जांच की थी।
12 साल तक ईडी में रहे तैनात
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2004 बैच के अधिकारी कुमार को एक साल पहले ईडी से वापस बुलाए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयुक्त (अपील) के रूप में तैनात किया गया था। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में करीब 12 वर्षों तक सेवा दी, जिससे वह एजेंसी में सबसे लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर रहने वाले अधिकारियों में से एक बने।
अप्रैल में मिली वीआरएस की मंजूरी
अधिकारियों के मुताबिक, सत्यब्रत कुमार (48 वर्षीय) को अप्रैल में सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अनुमति मिली थी। इस संबंध में औपचारिक आदेश इस महीने की शुरुआत में जारी किए गए। अधिकारियों ने बताया कि 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक पहुंचने से पहले उनके सरकारी सेवा में करीब 11 वर्ष और बाकी थे।
किन चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व किया?
सूत्रों के अनुसार, कुमार ने निजी कारणों से सरकारी सेवा छोड़कर आगे के निजी कार्य करने का फैसला लिया है। कुमार ने मुंबई स्थित ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से की गई कई बड़ी जांचों का नेतृत्व किया, जिनमें हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ करीब दो अरब डॉलर के कथित बैंक घोटाले का मामला, शराब कारोबारी विजय माल्या के बैंक ऋण घोटाले का मामला और महाराष्ट्र के कई नेताओं से जुड़े 'संवेदनशील' मामले शामिल हैं।
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वह पीएनबी घोटाले में अपराध की आय मानी गई विदेश में स्थित कई संपत्तियों को जब्त करने में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं। कुमार के अधीन ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय ने महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले की भी जांच की, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई नेताओं और व्यापारियों से जुड़े लिंक सामने आए थे।
एक साल के भीतर दूसरा मामला
यह एक साल से भी कम समय में दूसरी बार है, जब किसी अधिकारी ने ईडी छोड़ने के बाद सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया है। जुलाई 2025 में ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी सेवा से इस्तीफा दिया था, जिन्होंने अलग-अलग धन शोधन मामलों में दो मुख्यमंत्रियों हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की निगरानी की थी।