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PM: रूबियो का पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्योता क्यों है प्रोटोकॉल का उल्लंघन?, पूर्व राजनयिक ने बताई वजह

Mon, 25 May 2026 07:34 AM IST
Devesh Tripathi एएनआई, नई दिल्ली

सार

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने अपनी भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया। इस निमंत्रण को लेकर पूर्व राजनयिक वीना सीकरी ने कहा कि इस न्योता में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई औपचारिक पत्र जारी नहीं हुआ है।
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पूर्व राजनयिक वीना सीकरी - फोटो : ANI
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विस्तार
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पूर्व राजनयिक वीना सीकरी ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्हाइट हाउस से मिला निमंत्रण उचित प्रोटोकॉल का पालन किए बिना दिया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में सीकरी ने कहा कि निमंत्रण की स्थिति अभी भी अटकलों के दायरे में है।
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वीना सीकरी के अनुसार, "प्रधानमंत्री मोदी को कथित तौर पर व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण मिला है। जब कल विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, तो उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से निमंत्रण देने का जिक्र किया। हालांकि, यह निमंत्रण एक औपचारिक पत्र या विशिष्ट प्रत्यक्ष निमंत्रण के रूप में नहीं आया है। हमें अभी तक इसकी सटीक स्थिति का पता नहीं है।" 

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उन्होंने आगे कहा कि यह संभव है कि दोनों नेताओं की मुलाकात अगले महीने जी7 के इतर हो, या फिर साल के अंत में जब राष्ट्रपति ट्रंप फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।

चीन के दौरे से क्या है क्वाड बैठक का कनेक्शन? 
पूर्व राजनयिक ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा के तुरंत बाद क्वाड बैठक पर सहमति बनना दिलचस्प है। मार्को रूबियो की भारत यात्रा के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ होने वाली चर्चाओं का जिक्र किया, जिनमें क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के साथ-साथ गंभीर मुद्दों पर बातचीत होगी। 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन से कोई संयुक्त बयान या बड़ा आर्थिक सौदा नहीं हुआ, उसके बाद अमेरिका फिर से क्वाड की बात कर रहा है। रूबियो के एक संकेत से पता चलता है कि जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान या उसके बाद अमेरिका में क्वाड शिखर सम्मेलन हो सकता है। यह क्वाड प्रक्रिया में अमेरिकी हित के पुनरुद्धार को दर्शाता है।

क्वाड भारत के लिए क्यों जरूरी?
सीकरी ने आगे बताया कि समुद्री सुरक्षा क्वाड के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, खासकर दक्षिण चीन सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में। होर्मुज जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के 20% तेल और गैस की आपूर्ति यहीं से गुजरती है। दक्षिण चीन सागर में, चीन अधिक नियंत्रण थोपने और जहाजों की मुक्त आवाजाही रोकने की कोशिश कर रहा है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है और हम इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ चर्चा कर रहे हैं। क्वाड के बिना, दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और समुद्री संचार मार्ग जोखिम में हैं।"

उन्होंने यह भी जिक्र किया कि अमेरिकी विदेश सचिव ने कहा है कि नए ग्रीन कार्ड नियम भारत को लक्षित नहीं कर रहे हैं और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद भारत को अन्य देशों पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकते हैं। ऊर्जा सुरक्षा पर निश्चित रूप से डॉ. जयशंकर और रूबियो के बीच चर्चा होगी। भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण की नीति है। वे अमेरिका से अधिक ऊर्जा आपूर्ति खरीदने पर चर्चा करने में खुश हैं, जिसे उन्होंने पहले ही बढ़ा दिया है। 
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अमेरिका से तेल लेना महंगा 
वीना सीकरी ने कहा कि हालांकि, अमेरिकी शिपमेंट में अधिक समय लगता है और वे अधिक महंगे होते हैं, इसलिए भारत रूस, वेनेजुएला और अन्य देशों से भी बात कर रहा है। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा इसका एक उदाहरण है। भारत आर्कटिक परिषद में एक पर्यवेक्षक भी है, और जैसे-जैसे पिघलती बर्फ के कारण आर्कटिक क्षेत्र खुल रहे हैं, ऊर्जा सुरक्षा और मुक्त संचार मार्गों की संभावनाओं को देखा जा रहा है।
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