आईएएस अधिकारी अलपन बंदोपाध्याय पर गाज गिरा दी गई ...
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह कोलकाता में तूफान को लेकर एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के बैठक में नदारद रहने से केंद्र सरकार नाराज हो गई। नतीजा ये रहा कि केंद्र सरकार ने राज्य के मुख्य सचिव एवं पश्चिम बंगाल कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी अलपन बंदोपाध्याय पर गाज गिरा दी। वे 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले थे। केंद्र ने ही उनके तीन माह के सेवा विस्तार को मंजूरी दी थी।
कोलकाता में पीएम की बैठक को लेकर जो विवाद सामने आया, उसके कुछ ही घंटों के बाद बंदोपाध्याय को दिल्ली बुलाने का आदेश जारी कर दिया गया। अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। इस मामले में केंद्र सरकार ने इतनी तेजी दिखाई कि बंदोपाध्याय को रिलीव करने वाले लैटर में यह भी लिख दिया कि उन्हें 31 मई की सुबह 10 बजे से पहले दिल्ली में रिपोर्ट करना है। पत्र में केंद्र सरकार ने बंगाल सरकार से उन्हें जल्द से जल्द रिलीव करने का अनुरोध भी कर दिया। ममता बनर्जी ने चीफ सेक्रेटरी को रिलीव करने से मना कर दिया। इसके बाद 'केंद्र और दीदी' के बीच घमासान छिड़ गया है।
पहले केंद्र उनकी पोस्टिंग को लेकर बड़ी घोषणा तो करे...
दिल्ली सरकार में मुख्य सचिव रहे आईएएस अधिकारी पीके त्रिपाठी कहते हैं, केंद्र सरकार गलत दिशा में जा रही है। चीफ सेक्रेटरी होने के अलावा वह राज्य के कैडर का अधिकारी भी है। हालांकि वह अखिल भारतीय सेवा के नियमों के तहत नौकरी करता है। अलपन बंदोपाध्याय के मामले में सभी जानते हैं कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उनके जरिए निशाना तो ममता बनर्जी पर साधा गया है। जिस अधिकारी का कार्यकाल ही तीन माह का बचा है, उससे आप क्या करा लेंगे। हां, ये तब तो ठीक माना जा सकता है, जब केंद्र सरकार यह घोषणा करे कि हम अलपन बंदोपाध्याय को देश का गृह सचिव लगाने जा रहे हैं। दो साल तक वे इस पद से हिलेंगे नहीं। अगर गृह सचिव नहीं तो उन्हें कोविड टास्क फोर्स का मुखिया बना रहे हैं, केंद्र ऐसी घोषणा करने का दम दिखाए।
बंदोपाध्याय तुरंत ज्वाइन कर लेंगे। संजय मित्रा का केस अलग था। वहां उनकी सेवा के दो साल बचे हुए थे। 'आईएएस' अखिल भारतीय सेवा है, मगर ये भी तो कैडर बेस्ड है। राज्य में कोई आईएएस ज्यादा ही परेशान हो रहा है तो वह केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन दे सकता है। इसके कई अन्य कारण भी सकते हैं। इस मामले में बंदोपाध्याय को केंद्र में बुलाने का कोई लॉजिक ही नहीं है। खास बात तो ये है कि उनके खिलाफ कोई विजिलेंस जांच भी नहीं है। अगर ऐसा हुआ होता तो केंद्र उन्हें कभी नहीं बुलाता, मतलब वे बेदाग हैं।
बड़े भाई का रोल नहीं निभा रहा केंद्र: पीके त्रिपाठी
बंदोपाध्याय के केस में केंद्र अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रहा है। इससे सहकारी संघवाद को बड़ी चोट पहुंचती है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल को एक न समझें। यहां के नियम अलग हैं। केंद्र ने अभी इतनी बड़ी गलती कर दी है। ये बहुत बचकाना रवैया है। इससे भी आगे जाकर शक्तियों का दुरुपयोग करना है तो बंदोपाध्याय की तनख्वाह बंद करा दो। केंद्र और राज्य के बीच भाई का रिश्ता रहता है। केंद्र को बड़े भाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन वह इस जिम्मेदारी को पूरी तरह से नहीं निभा रहा है। ऐसे झगड़े देश की अस्मिता पर ही सवाल खड़ा कर देते हैं।
केंद्र, सीबीआई को जहां मन करता है, भेज देता है। क्या यह संभव है कि स्थानीय पुलिस की मदद के बिना सीबीआई अपना सारा काम पूरा कर वापस लौट सकती है। स्टेट पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। सरदार पटेल ने कहा था, आईएएस का किसी पार्टी या सरकार से कुछ लेना देना नहीं है। इस सेवा के अधिकारी राष्ट्रीय हित में काम करते हैं। वे कानून के दायरे में रह कर ड्यूटी देते हैं। चीफ सेक्रेटरी को तीन माह का एक्सटेंशन दिया जा सकता है, वह कभी-कभी ही सही, लेकिन अब यह एक परंपरा बन चुकी है।
पीएम की बैठक को लेकर कोई एकरूपता वाली पॉलिसी नहीं है
देश में प्रधानमंत्री जब बैठक करते हैं तो उसमें बहुत कुछ प्रोटोकॉल के दायरे में रहता है। पीएम की बैठक में ये जरूरी नहीं होता कि वहां विपक्ष का नेता भी हाजिर रहे। इस नीति में कहीं भी एकरूपता दिखाई नहीं पड़ती। बतौर पीके त्रिपाठी, क्या प्रधानमंत्री जब दूसरे राज्यों में जाते हैं तो वहां भी विपक्षी दलों के नेता बुलाए जाते हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाने के एकतरफा आदेश से स्तब्ध और हैरान हूं। 'यह एकतरफा आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाला, यह एतिहासिक रूप से अभूतपूर्व तथा पूरी तरह से असंवैधानिक है'। केंद्र ने राज्य सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद मुख्य सचिव का कार्यकाल एक जून से अगले तीन महीने के लिए बढ़ाने जो आदेश दिया था, अब उसे ही प्रभावी माना जाए।
ममता बनर्जी ने सोमवार को प्रधानमंत्री के नाम पांच पन्नों की चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने बंदोपाध्याय को रिलीव करने से मना कर दिया है। बनर्जी ने इस बार बंगाल में नाजुक दौर का हवाला दिया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार का आदेश पूरी तरह असंवैधानिक व कानूनी रूप से अस्थिर है। यह निर्णय राज्य के लोगों और उनके हितों के खिलाफ है।