पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान हुए रक्षा समझौते को देश के पूर्व रक्षा सचिव अजय कुमार ने ऐतिहासिक बताया है। कहा, अमेरिका 31 एमक्यू 9बी प्रीडेटर ड्रोन बेचने के साथ इन्हें भारत में ही असेंबल करने और एक पूरी एमआरओ हब बनाने के लिए भी राजी है। इससे यह ड्रोन उपयोग कर रहे कई देशों के सामने इनके रखरखाव, रिपेयर व ओवरहॉल (एमआरओ) के लिए भारत एक मजबूत विकल्प बन सकता है।
अजय कुमार ने कहा कि आमतौर पर अमेरिका जब किसी देश को उन्नत तकनीक व उपकरण बेचता है तो देश के बाहर रखरखाव आदि के लिए राजी नहीं होता, लेकिन भारत ने उसे ऐसा करने पर राजी कर लिया है। इसके मायने हैं कि इन ड्रोन का रखरखाव हमेशा भारत में हो सकेगा। यह भी उम्मीद की जा सकती है कि यही ड्रोन उपयोग कर रहे ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन आदि को भविष्य में इनका रखरखाव भारत से करवाने का विकल्प मिलेगा।
जीई414 पर समझौते से भी फायदा
अभी तय नहीं एमक्यू 9बी ड्रोन की कीमत, शोसल मीडिया पर फेक न्यूज न फैलाएं: रक्षा मंत्रालय
भारत द्वारा अमेरिका से खरीदे जा रहे एमक्यू-9बी ड्रोन की कीमत और विशेष शर्तें तय होना अभी बाकी है, इसलिए इन्हें जिस कीमत पर खरीदने की बात सोशल मीडिया पर बताई जा रही है, वह भ्रामक है। देश रक्षा मंत्रालय ने रविवार को इस वक्तव्य के साथ निवेदन किया कि नागरिक इस विषय पर फर्जी खबरें फैलाने से बचें, ताकि इनसे सेना के मनोबल को नुकसान न पहुंचे। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा खरीद के लिए दी की गई आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) में अमेरिकी सरकार द्वारा मुहैया जानकारी के अनुसार अनुमानित कीमत 307.2 करोड़ डॉलर आंकी गई है। लेकिन अमेरिका से नीतिगत स्वीकृति मिलने के बाद खरीद की कीमत पर बातचीत होगी।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में डीएसी ने 15 जून को एओएन प्रदान की थी। इसे एमक्यू 9बी ड्रोन खरीद के लिए शुरुआती अनुमति कहा जा सकता है। भारत अमेरिका से कुल 31 ड्रोन खरीदने जा रहा है। भारत-अमेरिका ने पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान खरीद को अंतिम रूप दिया है।
खरीद प्रक्रिया विफल करने को फैला रहे फर्जी खबरें
खरीद प्रक्रिया : यह होंगे चरण
मंत्रालय ने बताया कि यह खरीद विदेशी सैन्य बिक्री (एफएमएस) जरिए से होगी। यह ड्रोन बनाने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स (जीए) द्वारा दूसरे देशों के लिए तय की गई ‘सर्वश्रेष्ठ-कीमत’ से तुलना करके भारत कीमत पर बात करेगा। एफएमएस के तहत अमेरिकी सरकार को निवेदन पत्र (एलओआर) भेजा जाएगा, इसमें सेना के तीनों अंगों की जरूरतों को बताया जाएगा, उपकरण की विस्तृत जानकारी दी जाएगी और खरीद की शर्तें रखी जाएंगी। इसके आधार पर अमेरिकी सरकार प्रस्ताव व स्वीकार्यता पत्र (एलओए) जारी करेगी। इसके आधार पर उपकरण की विशेषताओं, खरीद की शर्तों और अमेरिकी सरकार व जीए द्वारा प्रस्तावित ड्रोन की कीमत को अंतिम रूप दिया जाएगा।
नौसेना को मिलेंगे सबसे ज्यादा ड्रोन
31 की संख्या में खरीदे जा रहे एमक्यू 9बी ड्रोन में से 15 नौसेना को दिए जाएंगे। यह सी-गार्जियन प्रारूप के ड्रोन सामुद्रिक निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध नीति और क्षितिज-पार लक्ष्य भेदने में सक्षम होंगे। वायुसेना और थल सेना को 8-8 की संख्या में स्काय-गार्जियन प्रारूप के ड्रोन दिए जाएंगे। यह हाई-ऑल्टिट्यूड लॉन्ग-एंड्यूरेंस (हेल) ड्रोन 35 घंटे तक आसमान में रह सकते हैं और 450 किलो वजनी बम व 4 हेलफायर मिसाइल साथ ले जा सकते हैं। नौसेना 2020 में इन्हें 1 साल की लीज पर ले चुकी है, बाद में लीज अवधि बढ़ाई गई थी।