फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Drone: ‘अब सिर्फ भारत में ही होगा 9B प्रीडेटर ड्रोन का रखरखाव-मरम्मत’, यूएस दौरे पर बोले पूर्व रक्षा सचिव

Mon, 26 Jun 2023 05:33 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच जीई 414 फाइटर जेट इंजन भारत में बनाने पर हुए समझौते पर अजय कुमार ने कहा कि भारत विमानों के इंजन निर्माण में पीछे रहा है, लेकिन ताजा समझौता इस क्षेत्र के विकास में मदद करेगा।
विज्ञापन
ड्रोन - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान हुए रक्षा समझौते को देश के पूर्व रक्षा सचिव अजय कुमार ने ऐतिहासिक बताया है। कहा, अमेरिका 31 एमक्यू 9बी प्रीडेटर ड्रोन बेचने के साथ इन्हें भारत में ही असेंबल करने और एक पूरी एमआरओ हब बनाने के लिए भी राजी है। इससे यह ड्रोन उपयोग कर रहे कई देशों के सामने इनके रखरखाव, रिपेयर व ओवरहॉल (एमआरओ) के लिए भारत एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

अजय कुमार ने कहा कि आमतौर पर अमेरिका जब किसी देश को उन्नत तकनीक व उपकरण बेचता है तो देश के बाहर रखरखाव आदि के लिए राजी नहीं होता, लेकिन भारत ने उसे ऐसा करने पर राजी कर लिया है। इसके मायने हैं कि इन ड्रोन का रखरखाव हमेशा भारत में हो सकेगा। यह भी उम्मीद की जा सकती है कि यही ड्रोन उपयोग कर रहे ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन आदि को भविष्य में इनका रखरखाव भारत से करवाने का विकल्प मिलेगा।

जीई414 पर समझौते से भी फायदा

विज्ञापन

अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच जीई 414 फाइटर जेट इंजन भारत में बनाने पर हुए समझौते पर अजय कुमार ने कहा कि भारत विमानों के इंजन निर्माण में पीछे रहा है, लेकिन ताजा समझौता इस क्षेत्र के विकास में मदद करेगा। स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने का लक्ष्य हासिल करने में भी देश को इस समझौते से मदद मिलेगी।

अभी तय नहीं एमक्यू 9बी ड्रोन की कीमत, शोसल मीडिया पर फेक न्यूज न फैलाएं: रक्षा मंत्रालय
भारत द्वारा अमेरिका से खरीदे जा रहे एमक्यू-9बी ड्रोन की कीमत और विशेष शर्तें तय होना अभी बाकी है, इसलिए इन्हें जिस कीमत पर खरीदने की बात सोशल मीडिया पर बताई जा रही है, वह भ्रामक है। देश रक्षा मंत्रालय ने रविवार को इस वक्तव्य के साथ निवेदन किया कि नागरिक इस विषय पर फर्जी खबरें फैलाने से बचें, ताकि इनसे सेना के मनोबल को नुकसान न पहुंचे। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा खरीद के लिए दी की गई आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) में अमेरिकी सरकार द्वारा मुहैया जानकारी के अनुसार अनुमानित कीमत 307.2 करोड़ डॉलर आंकी गई है। लेकिन अमेरिका से नीतिगत स्वीकृति मिलने के बाद खरीद की कीमत पर बातचीत होगी।  

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में डीएसी ने 15 जून को एओएन प्रदान की थी। इसे एमक्यू 9बी ड्रोन खरीद के लिए शुरुआती अनुमति कहा जा सकता है। भारत अमेरिका से कुल 31 ड्रोन खरीदने जा रहा है। भारत-अमेरिका ने पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान खरीद को अंतिम रूप दिया है।

खरीद प्रक्रिया विफल करने को फैला रहे फर्जी खबरें

विज्ञापन

मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर बताई जा रही ड्रोन की कीमत सही नहीं हैं, वे अंदाजे से बताई जा रही हैं। ऐसी बातें गलत उद्देश्यों से फैलाई जा रही हैं। यह निर्धारित खरीद प्रक्रिया विफल करने का प्रयास है। सभी से निवेदन है कि इन्हें न फैलाएं, इनका सेना के मनोबल पर गंभीर असर पड़ता है, खरीद प्रक्रिया को भी नुकसान हो सकता है।

खरीद प्रक्रिया : यह होंगे चरण
मंत्रालय ने बताया कि यह खरीद विदेशी सैन्य बिक्री (एफएमएस) जरिए से होगी। यह ड्रोन बनाने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स (जीए) द्वारा दूसरे देशों के लिए तय की गई ‘सर्वश्रेष्ठ-कीमत’ से तुलना करके भारत कीमत पर बात करेगा। एफएमएस के तहत अमेरिकी सरकार को निवेदन पत्र (एलओआर) भेजा जाएगा, इसमें सेना के तीनों अंगों की जरूरतों को बताया जाएगा, उपकरण की विस्तृत जानकारी दी जाएगी और खरीद की शर्तें रखी जाएंगी। इसके आधार पर अमेरिकी सरकार प्रस्ताव व स्वीकार्यता पत्र (एलओए) जारी करेगी। इसके आधार पर उपकरण की विशेषताओं, खरीद की शर्तों और अमेरिकी सरकार व जीए द्वारा प्रस्तावित ड्रोन की कीमत को अंतिम रूप दिया जाएगा।

नौसेना को मिलेंगे सबसे ज्यादा ड्रोन
31 की संख्या में खरीदे जा रहे एमक्यू 9बी ड्रोन में से 15 नौसेना को दिए जाएंगे। यह सी-गार्जियन प्रारूप के ड्रोन सामुद्रिक निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध नीति और क्षितिज-पार लक्ष्य भेदने में सक्षम होंगे। वायुसेना और थल सेना को 8-8 की संख्या में स्काय-गार्जियन प्रारूप के ड्रोन दिए जाएंगे। यह हाई-ऑल्टिट्यूड लॉन्ग-एंड्यूरेंस (हेल) ड्रोन 35 घंटे तक आसमान में रह सकते हैं और 450 किलो वजनी बम व 4 हेलफायर मिसाइल साथ ले जा सकते हैं। नौसेना 2020 में इन्हें 1 साल की लीज पर ले चुकी है, बाद में लीज अवधि बढ़ाई गई थी।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें