पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस (सीजेआई) आरएम लोढ़ा ने भी दिल्ली हाईकोर्ट के जज संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस (रिटायर्ड) लोढ़ा ने बुधवार को कहा कि पिछले साल चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत चार वरिष्ठतम जजों द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ। उच्चतम न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम के कामकाज ने उस समय उठाई गई चिंताओं को और बढ़ाने का काम किया है।
जस्टिस लोढ़ा ने वरिष्ठ जजों की अनदेखी कर जस्टिस खन्ना के नाम की सिफारिश करने के कॉलेजियम के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा, '12 जनवरी 2018 को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने तब दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के तौर पर तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे, उसमें जजों की नियुक्ति का मुद्दा भी शामिल था। चिंताएं अब भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में कॉलेजियम के फैसले ने इसे और बढ़ा दिया है। मुझे नहीं लगता कि एक साल बाद भी कुछ भी बदला है।'
जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि अब एकमात्र उपाय यह है कि भविष्य में कॉलेजियम अन्य नामों पर विचार करे, जैसा जस्टिस दिनेश माहेश्वरी के मामले में हुआ। छह सप्ताह पहले जस्टिस माहेश्वरी से जूनियर अजय रस्तोगी को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया गया। अब माहेश्वरी को जज बनाया गया है, लिहाजा जिनकी अनदेखी की गई उनके नामों पर दोबारा विचार किया जाए।