दो अगस्त, 1993 को रक्षाबंधन के दिन शेषन ने एक 17 पेज का आदेश जारी किया कि जब तक सरकार चुनाव आयोग की शक्तियों को मान्यता नहीं देती, तब तक देश में कोई भी चुनाव नहीं कराया जाएगा।
उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि जब तक वर्तमान गतिरोध दूर नहीं होता, जो कि केवल भारत सरकार द्वारा बनाया गया है, चुनाव आयोग अपने आप को अपने सांविधानिक कर्तव्य निभा पाने में असमर्थ पाता है। उसने तय किया है कि उसके नियंत्रण में होने वाले हर चुनाव, जिसमें हर दो साल पर होने वाले राज्यसभा के चुनाव और विधानसभा के उप चुनाव भी, जिनके कराने की घोषणा की जा चुकी है, आगामी आदेश तक स्थगित रहेंगे।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की राज्यसभा सीट पर चुनाव नहीं होने दिया जिसकी वजह से केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु इतने नाराज हुए कि उन्होंने उन्हें पागल कुत्ता कह डाला।
साल 1992 के उत्तर प्रदेश चुनाव में उन्होंने सभी जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अफसरों और 280 पर्यवेक्षकों से कह दिया था कि एक भी गलती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ खबरों के मुताबिक तब एक रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा था कि हम एक दयाविहीन इंसान की दया पर निर्भर हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही शेषन ने करीब 50,000 अपराधियों को ये विकल्प दिया था कि या तो वे अग्रिम जमानत ले लें या पुलिस की हिरासत में चले जाएं।
मतदाता पहचान पत्र शुरू कराया
चुनावों में मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल भी उनकी वजह से ही शुरू हुआ। शुरू में जब नेताओं ने यह कहकर विरोध किया कि देश में इतनी खर्चीली व्यवस्था संभव नहीं है तो उन्होंने कहा था कि अगर मतदाता पहचान पत्र नहीं बनाए तो 1995 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। कई राज्यों में तो उन्होंने चुनाव इसलिए स्थगित करवा दिए क्योंकि पहचान पत्र तैयार नहीं हुए थे।
साल 1993 में हिमाचल के तत्कालीन राज्यपाल गुलशेर अहमद बेटे का प्रचार करने सतना पहुंचे थे। अखबारों में तस्वीर छपी। गुलशेर को पद छोड़ना पड़ा।
लालू से जमकर लिया लोहा
बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव को सबसे ज्यादा जीवन में किसी ने परेशान किया तो वे शेषन ही थे। बिहार का 1995 का चुनाव ऐतिहासिक रहा। लालू, शेषन को जमकर लानतें भेजते। कहते- शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर के गंगाजी में हेला देंगे। बिहार में चार चरणों में चुनाव का एलान हुआ और चार बार ही तारीखें बदली गईं। यहां सबसे लंबे चुनाव हुए।