फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना काल में मध्यप्रदेश के विधानसभा उप चुनावों को बनाया सकता है पायलट प्रोजेक्ट: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त

Thu, 07 May 2020 11:16 AM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोरोना के संकट काल में ही दक्षिण कोरिया ने 15 अप्रैल को सफलतापूर्वक संपन्न कराया चुनाव
  • बदलने होंगे चुनाव प्रचार के तरीके, सोशल डिस्टेंसिंग का रखना होगा ख्याल
  • पीपीई किट पहन कर प्रचार, सभी दलों को भरोसे में लेकर करने होंगे कड़े उपाय
विज्ञापन
ओ पी रावत - फोटो : ANI (सांकेतिक)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना ने पूरी दुनिया के सोचने, समझने और काम करने का तरीका बदल दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह अभी लंबा खिंच सकता है, इसलिए अब कोरोना के खतरे के बीच ही हमें जीने के तरीके विकसित करने होंगे।

विज्ञापन

ऐसे समय में अब लोगों को यह चिंता सताने लगी है कि भारत जैसे देश में चुनाव कैसे संपन्न होंगे जहां चुनाव भी एक उत्सव के रुप में संपन्न होता है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत का मानना है कि कोरोना के कारण भारत में चुनावों का परिदृश्य काफी बदल सकता है।

चुनाव प्रचार करने का तरीका भी अब रैलियों से ऑनलाइन और टीवी जैसे माध्यमों पर प्रमुखता के साथ सामने आ सकता है। देश में जल्दी ही मध्यप्रदेश में लगभग दो दर्जन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना तय है।
विज्ञापन


अमर उजाला डिजिटल के साथ एक कार्यक्रम में बात करते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि कोरोना के इसी संकटकाल में दक्षिण कोरिया ने सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराए हैं।

अमेरिका, जहां फिलहाल कोरोना संक्रमण ज्यादा गंभीर स्थिति में है, वहां भी तीन नवंबर को चुनाव कराने की तैयारी हो रही है। ऐसे में भारत को भी इन परिस्थितियों में चुनाव कराने के तरीकों पर विचार करना चाहिए।

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनने के पूर्व ही लगभग दो दर्जन विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। नियमों के मुताबिक अगले छह महीनों के अंदर ये चुनाव कराने अनिवार्य होंगे।

ओपी रावत ने कहा कि यह उपचुनाव कोरोना काल में चुनाव के एक पायलेट प्रोजेक्ट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका अनुभव बाद में बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के समय देश के बहुत काम आ सकता है।

बदल सकता है चुनाव प्रचार का तरीका

अमर उजाला के इस सवाल पर कि कोरोना संकट काल में चुनाव प्रचार के तरीके में किस तरह का बदलाव किया जा सकता है, रावत ने कहा कि इस माहौल में रैलियों में प्रचार करना संभव नहीं रह जाएगा क्योंकि बड़ी रैलियों मैं सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर पाना संभव नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि इस दौरान ऑनलाइन और टीवी-रेडियो जैसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चुनाव प्रचार के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

घर-घर प्रचार में पहनें पीपीई किट

भारत चुनाव प्रचार में घर-घर जाकर प्रचार करना बहुत लोकप्रिय होता है। लेकिन इस दौरान इस तरह का प्रचार कैसे हो सकेगा।

अमर उजाला डॉट काम के इस सवाल पर ओपी रावत ने कहा कि इस दौरान उम्मीदवार और उनके साथ चलने वाले लोग पीपीई किट जैसे साधनों का उपयोग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव लोगों और क्वारंटीन लोगों के मतदान के लिए अलग समय पर व्यवस्था दी जा सकती है।

बूथ पर बदलने पड़ेंगे इंतजाम

ओपी रावत ने कहा कि कोरोना काल में बूथ पर एक साथ में ज्यादा लोगों का आना ठीक नहीं होगा। ऐसे में ज्यादा बूथ और ज्यादा चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।

अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को अलग-अलग समय पर वोट डालने के लिए बुलाया जा सकता है। इसके लिए लाउडस्पीकर जैसे साधनों से लोगों को दूर रहने और सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए वोट डालने के लिए कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एप से लोगों को किस कतार में कितने लोग हैं और मतदान का समय आने में कितना समय लग सकता है, इसकी जानकारी लोगों को दी जा सकती है।

इसलिए आधुनिक तरीके अपनाकर लोगों को कोरोना काल में भी मतदान के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

क्या ऑनलाइन वोटिंग का उपयोग किया जा सकता है? अमर उजाला के इस सवाल पर ओपी रावत ने कहा कि अभी भारत की व्यवस्था इसके लिए तैयार नहीं है। इसके लिए चुनाव आयोग की तैयारियां पूरी नहीं हैं।

इसके लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता भी पड़ेगी। सभी राजनीतिक दलों के साथ विमर्श करना चाहिए क्योंकि पूरी चुनाव प्रक्रिया के वे सबसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं। इसलिए सभी दलों से विचार-विमर्श कर उनके उचित उपायों को अपनाकर चुनाव के नियमों में भी बदलाव किया जा सकता है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें