अमर उजाला के इस सवाल पर कि कोरोना संकट काल में चुनाव प्रचार के तरीके में किस तरह का बदलाव किया जा सकता है, रावत ने कहा कि इस माहौल में रैलियों में प्रचार करना संभव नहीं रह जाएगा क्योंकि बड़ी रैलियों मैं सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर पाना संभव नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि इस दौरान ऑनलाइन और टीवी-रेडियो जैसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चुनाव प्रचार के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
भारत चुनाव प्रचार में घर-घर जाकर प्रचार करना बहुत लोकप्रिय होता है। लेकिन इस दौरान इस तरह का प्रचार कैसे हो सकेगा।
अमर उजाला डॉट काम के इस सवाल पर ओपी रावत ने कहा कि इस दौरान उम्मीदवार और उनके साथ चलने वाले लोग पीपीई किट जैसे साधनों का उपयोग कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव लोगों और क्वारंटीन लोगों के मतदान के लिए अलग समय पर व्यवस्था दी जा सकती है।
ओपी रावत ने कहा कि कोरोना काल में बूथ पर एक साथ में ज्यादा लोगों का आना ठीक नहीं होगा। ऐसे में ज्यादा बूथ और ज्यादा चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को अलग-अलग समय पर वोट डालने के लिए बुलाया जा सकता है। इसके लिए लाउडस्पीकर जैसे साधनों से लोगों को दूर रहने और सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए वोट डालने के लिए कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एप से लोगों को किस कतार में कितने लोग हैं और मतदान का समय आने में कितना समय लग सकता है, इसकी जानकारी लोगों को दी जा सकती है।
इसलिए आधुनिक तरीके अपनाकर लोगों को कोरोना काल में भी मतदान के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
क्या ऑनलाइन वोटिंग का उपयोग किया जा सकता है? अमर उजाला के इस सवाल पर ओपी रावत ने कहा कि अभी भारत की व्यवस्था इसके लिए तैयार नहीं है। इसके लिए चुनाव आयोग की तैयारियां पूरी नहीं हैं।
इसके लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता भी पड़ेगी। सभी राजनीतिक दलों के साथ विमर्श करना चाहिए क्योंकि पूरी चुनाव प्रक्रिया के वे सबसे महत्वपूर्ण अंग होते हैं। इसलिए सभी दलों से विचार-विमर्श कर उनके उचित उपायों को अपनाकर चुनाव के नियमों में भी बदलाव किया जा सकता है।