SY Quraishi: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिकी फंड के इस्तेमाल की खबरों को गलत बताया है। एसवाई कुरैशी ने एक बयान जारी कर कहा कि, इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अमेरिकी एजेंसी के पैसे के इस्तेमाल की खबरें गलत हैं। एसवाई कुरैशी ने एक बयान जारी कर कहा, मीडिया के एक हिस्से में खबर आयी है कि 2012 में जब मैं मुख्य चुनाव आयुक्त था तब एक अमेरिकी एजेंसी से भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए फंडिंग को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है।
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2012 में एक एमओयू हुआ था- कुरैशी
उन्होंने कहा, 2012 में एक एमओयू हुआ था लेकिन वह इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स के साथ हुआ था लेकिन यह भारतीय चुनाव आयोग के प्रशिक्षण और संसाधन केंद्र में दुनिया के इच्छुक देशों के चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दिए जाने से संबंधित था। ईसीआई का यह प्रशिक्षण केंद्र, इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईडीईएम) में स्थित है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग इस तरह के एमओयू कई अन्य चुनाव प्रबंधन ईकाईयों के साथ करता है और इसमें किसी तरह का वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ था न ही ऐसे लेन-देन का कोई वादा ही था।
अमेरिकी विभाग ने रोकी एक 21 मिलियन डॉलर की मदद
वहीं भारत में वोटिंग बढ़ाने के लिए मिलने वाली 21 मिलियन डॉलर की मदद को अमेरिका की सरकारी दक्षता विभाग की तरफ से रोक दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, डीआजीई ने अंतरराष्ट्रीय मदद बजट में कटौती के तहत यह फैसला लिया है।