कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद
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बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ बड़ी संख्या में नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मायावती के नाराज होने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने हमारे वर्तमान विधायक को तोड़ लिया था, तब भी हम नाराज नहीं हुए। इसके बावजूद हम चुनाव में गठबंधन को लेकर मायावती जी से मिले थे। जो लोग शामिल हुए हैं, उनमें से कुछ को बसपा से निकाला जा चुका है और कुछ उनके निकाले जाने के कारण पार्टी छोड़ आए हैं।
आजाद ने भविष्य में विपक्षी एकता की मजबूती और बड़े उद्देश्य को लेकर होने वाले समझौते से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम तो 27 साल यूपी बेहाल का नारा लेकर चुनाव में उतरे थे लेकिन रणक्षेत्र में ही सपा से समझौता हो गया।
कांग्रेस का मंच छोटा पड़ गया
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस के मंच पर दो पंक्तियों में कुर्सियां लगाने के बावजूद बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता खड़े रहे या हॉल के बाहर थे। इसमें यूपी के विभिन्न हिस्सों और वर्गों के नेता शामिल हैं। उनके साथ आए कार्यकर्ताओं के कारण भी कांग्रेस मुख्यालय में भीड़ बढ़ गई।
कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व मंत्रियों में ओपी सिंह, रघुनाथ प्रसाद शंखवार, लियाकत अली, पूर्व एमएलसी में अनिल अवाना और हुस्ना सिद्दीकी, पूर्व विधायक वीजेंद्र व्यास, राव वारिस, हाजी शाहबन, अरशद खान, मो. आसिफ, अली यूसुफ अली के अलावा प्रमुख नेताओं में ब्रह़्म स्वरूप सागर, अच्छेलाल निषाद, केपी मावी, कैप्टन दिनेश सिंह, शिव शंकर भुरजी, प्रीतम सिंह प्रेमी, देशराज, प्रदेश प्रभारी जमीरूद्दीन, मनोज सक्सेना, हीरालाल विश्वकर्मा, मुमताज अली और सैय्यद महबूल अली आदि मौजूद थे।