लद्दाख में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर गतिरोध जारी है। ऐसे ही समय में पड़ोसी देश नेपाल में भारत विरोधी भावनाओं का उभार देश के लिए अच्छी खबर नहीं है।
नेपाल के मामले में भारत ने भी कई गलतियां की हैं। हमने उसे बिना किसी विशेष प्रयास के हमेशा अपने ही पाले में बने रहने की गलतफहमी पाल ली थी जिसकी कीमत भारत को चुकानी पड़ रही है।
जबकि ऐसे संबंधों को हमेशा बराबरी के पैमाने पर कसते रहने की जरूरत होती है।
रे ने कहा कि नेपाली राजनयिकों की अकसर शिकायत रही है कि भारत उसे अपना भाई मानने की कोशिश करता है जिसमें हमेशा एक बड़ा भाई और एक छोटा भाई होता है।
जबकि नेपाल जैसे देश भारत के साथ बराबरी का मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं। भारत को बदले समय में अपने रुख में बदलाव करना चाहिए।
नेपाल और भारत के पुराने राजनयिकों के संबंध बड़े करीबी हुआ करते थे, जबकि आज दोनों देशों की नई पीढ़ी आपस में कम करीबी संबंध रखती हैं।
भारत को इस मोर्चे पर अपनी सहभागिता बढ़ानी चाहिए।
इसके लिए केवल राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, छात्रों, सामाजिक संगठनों, सामुदायिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक दौरे बढ़ाकर एक दूसरे के करीब जाने की कोशिश की जानी चाहिए।