IAF: पूर्व वायुसेना उप प्रमुख नागेश कपूर ने तेजस एमके-2 की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2030 के दशक के मध्य तक बड़ी संख्या में शामिल होने पर ये विमान फ्रंटलाइन भूमिका में प्रासंगिक नहीं रह जाएंगे। वहीं, तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में भी देरी हो रही है, जानें क्या है वजह।
वायुसेना के पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-2 कार्यक्रम को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। करीब दो महीने पहले ही रिटायर हुए कपूर ने दोटूक कहा कि जब तेजस एमके-2 वर्ष 2030 के दशक के मध्य में बड़ी संख्या में सेवा में शामिल होंगे, तब तक ये फ्रंटलाइन भूमिका में ऑपरेशन के लिहाज से प्रासंगिक नहीं रह जाएंगे।
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उन्होंने साफ किया कि देश के विशाल आकार के कारण 5वीं और 6वीं पीढ़ी के विमानों को हर जगह तैनात नहीं किया जा सकता, इसलिए बचे हुए अंतराल को भरने के लिए इस श्रेणी के विमानों की कुछ जरूरत अवश्य रहती है। वर्तमान में भारत के पास न तो पांचवीं और न ही छठी पीढ़ी का कोई प्लेटफॉर्म है। एजेंसी
पांच साल पहले 83 तेजस का आर्डर डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हुई
उन्होंने कहा कि वायुसेना ने 2021 में करीब 46,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत 83 तेजस एमके-1ए विमानों का ऑर्डर दिया था, जिसकी डिलीवरी अभी तक शुरू नहीं हुई है। अमेरिकी निर्मित जेई एफ404-आईएन20 इंजन की आपूर्ति में देरी और रडार, एवियोनिक्स व हथियारों के एकीकरण की समस्याओं के कारण निर्माण प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, 25 सितंबर 2025 को 62,370 करोड़ रुपये की लागत से 97 और तेजस एमके-1ए जेट्स का दूसरा ऑर्डर भी घोषित किया गया था।