सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के तहत भुगतान के दावों का एक महीने के भीतर भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार को एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति का ‘त्वरित’ गठन करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों ‘अनावश्यक प्रताड़ना’ से बचाने के लिए दिया है।
जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को सात दिनों के भीतर समिति का गठन करने के निर्देश भी दिए। न्यायालय ने निर्देश दिया कि समिति में विशेष महानिदेशक, महानिदेशक, दो अतिरिक्त निदेशक और एक विशेषज्ञ होगा। ये लोग यह सुनिश्चित करेंगे कि पेंशन भोगियों के दावों का समय पर और बाधा रहित निपटान किया जाए।
पीठ ने कहा, ‘सीजीएचएस द्वारा पेंशन लाभार्थियों के चिकित्सा भुगतान दावों (एमआरसी) की धीमी गति से निपटान के कारण वरिष्ठ नागरिकों पर मानसिक, शारीरिक और वित्तीय असर पड़ता है। हमारा मानना है कि ऐसे सभी दावों का संबंधित मंत्रालय में सचिव स्तर की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की तरफ से निपटान किया जाना चाहिए। ये समिति ऐसे मामलों के त्वरित निपटाने के लिए हर महीने बैठक करे।
ये निर्देश एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की याचिका पर आए हैं जिन्हें दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉटर्स अस्पताल और मुंबई के जसलोक अस्पताल में उनके इलाज के लिए वर्ष 2014 में सीजीएसएच के तहत भुगतान करने से इनकार कर दिया गया क्योंकि इस योजना के तहत इन अस्पतालों के नाम शामिल नहीं थे। पीठ ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 4,99,555 रुपये दें जो उनके इलाज पर खर्च हुए।