ओडिशा के मयूरभंज जिले के सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में सोमवार देर रात शिकारियों के एक समूह ने एक 40 वर्षीय वन रक्षक बिमल कुमार जेना की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने मंगलवार को जानकारी देते हुए कहा कि बिमल कुमार जेना ड्यूटी पर गश्त कर रहे थे इस दौरान उनका सामना शिकारियों से हुआ।
शिकारीयों ने एक हिरण का शिकार किया था, बिमल कुमार जेना और अन्य वनकर्मियों को देखकर शिकारी भागने लगे, इसके बाद वनकर्मियों ने उनका पीछा किया और मौके से भागने के साथ ही शिकारियों ने कथित तौर पर वन रक्षक बिमल कुमार जेना पर फायरिंग कर दी और उनके सीने में जा लगी। गोली लगने से जेना की मौके पर ही मौत हो गई।
बिमल कुमार जेना को वन कर्मियों की एक टीम के साथ पीथाबाटा दक्षिण रेंज और रिजर्व की नवाना रेंज के बौंसाखल बीट में नियुक्त किया गया था। पुलिस ने कहा कि बिमल कुमार जेना को बारीपदा के पीआरएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक प्रकाश चंद गोगिनेनी ने कहा कि घटना के बाद वन क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया गया है। वन रक्षक को मारने वाले शिकारी स्थानीय थे और नियमित रूप से जंगल में शिकार कर रहे थे। उनका अक्सर वन अधिकारियों के साथ टकराव होता था।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब सिमिलिपाल में शिकारियों ने किसी वन रक्षक को गोली मारी है। वे अभी भी जंगल में छिपे हुए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के सिलसिले में बंगरीपोशी पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद जेना के शव को सलबानी वन बंगले के पास शहीद चौकी ले जाया गया जहां वनकर्मियों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
ओडिशा में मिली अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की प्राचीन मूर्ति
इधर, कला एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए भारतीय राष्ट्रीय न्यास (इनटैक) ने बताया कि ओडिशा के पुरी जिले के पिपली ब्लॉक में बौद्ध धर्म के देवता अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की एक प्राचीन प्रतिमा मिली है। इसके पीछे शिलालेख हैं। लगभग 10 इंच ऊंची प्रतिमा बागेश्वरपुर गांव के रसमेश्वर शिव मंदिर के गर्भगृह से मिली है। मंदिर के पुजारी ने इसे वर्षों तक देवताओं के सिंहासन पर रखकर ध्यानी महादेव के रूप में इसकी पूजा-अर्चना की थी।