विदेश सचिव विजय गोखले दो दिन के दौरे पर ईरान पहुंच गए हैं। वह 15 और 16 सितंबर को वहां अपने ईरानी समकक्ष उपविदेश मंत्री सईद अब्बास अरागची के साथ 16वीं विदेश कार्यालय परामर्श वार्ता में हिस्सा लेंगे। वार्ता में अहम द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन इसके केंद्र में दोनों देशों के बीच का ऊर्जा समझौता यानी कच्चे तेल का आयात ही रहने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शनिवार को बताया कि गोखले की अपने दौरे के दौरान ईरानी विदेश मंत्री जवाद जरीफ से भी मिलने की संभावना है। गोखले की अरागची के साथ वार्ता के दौरान 2015 में ईरान के साथ अन्य देशों के परमाणु समझौते यानी ज्वाइंट कांप्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीए) और पिछले साल अमेरिका के जेसीपीए से अलग होने पर भी चर्चा होगी, जो अमेरिका की तरफ से ईरान पर लगाए प्रतिबंधों का मूल कारण है।
बता दें कि, मई में ईरान से तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंधों के लिए अमेरिका से मिली छह महीने की छूट खत्म होने पर भारत ने कहा था कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के तहत ईरान से रिश्तों को तीन तथ्यों के आधार पर तय करेगा। इन तीन तथ्यों में देश की ऊर्जा सुरक्षा, वाणिज्यिक और आर्थिक हित शामिल हैं।
नवंबर, 2018 में अमेरिका ने भारत, चीन, ग्रीस, इटली, ताइवान, जापान, तुर्की और दक्षिण कोरिया को ईरान से तेल आयात करने के लिए छह महीने की छूट दी थी। यह छूट दो मई को खत्म हो गई थी। इसके बाद से भारत ने ईरान से न के बराबर ही तेल आयात किया है, जबकि भारत को तेल सप्लाई करने वाले देशों में ईरान तीसरे नंबर पर है।