फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान: मिलिट्री इंटेलिजेंस में सेंध लगा रही हैं 'विदेशी सीक्रेट एजेंसियां', जुटा रही हैं लड़ाकू यूनिटों की जानकारी

सार

डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस 'डीजीएमआई' और 'आईबी' ने इसे लेकर आर्मी एवं दूसरे सशस्त्र बलों को सचेत किया है। फोन कॉल या सोशल मीडिया के जरिए अगर कोई स्टाफ कर्मी किसी अपरिचित के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी...
विज्ञापन
भारतीय सेना (प्रतिकात्मक) - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विदेशी सीक्रेट एजेंसियां, जिनमें आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट भी शामिल हैं, वे भारतीय सेना की 'मिलिट्री इंटेलिजेंस' इकाई में सेंध लगाने का प्रयास कर रही हैं। इनका मकसद भारतीय सेना की लड़ाकू यूनिटों की अधिक से अधिक जानकारी जुटाना है। इसके लिए विदेशी एजेंसियां, भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को निशाना बना रही हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस 'डीजीएमआई' और 'आईबी' ने इसे लेकर आर्मी एवं दूसरे सशस्त्र बलों को सचेत किया है। फोन कॉल या सोशल मीडिया के जरिए अगर कोई स्टाफ कर्मी किसी अपरिचित के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन


पिछले सप्ताह ही कार्यालय रक्षा लेखा महानियंत्रक, पालम दिल्ली छावनी द्वारा इस मामले में एक आदेश जारी किया गया है। हालांकि यह आदेश 'डीजीएमआई' के हवाले से सेना की सभी यूनिटों में जारी हुआ है। डीजीएमआई को इस तरह की जानकारी मिली है कि विदेशी सीक्रेट एजेंसियां, भारतीय सेना की लड़ाकू यूनिटों को लेकर खुफिया सूचना हासिल करना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइटों का जाल बिछाया है। साथ ही व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से भी वे एजेंसियां हमारी सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां बाहर निकालने का प्रयास करती हैं।

संयुक्त सैन्य कमान, इस अवधारणा के विषय में क्या चल रहा है, कौन राजी है, कौन नहीं, इस संबंध में विदेशी एजेंसियां दस्तावेजों सहित सूचना निकालने का प्रयास कर रही हैं। संयुक्त सैन्य कमान का ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी किसे मिली है। कुल कितनी रिपोर्ट तैयार होंगी। फाइनल नोट किसके द्वारा तैयार किया जाएगा। 'लैंड थिएटर कमांड' के गठन को लेकर क्या चल रहा है, इससे जुड़ी जानकारी भी विदेशी एजेंसियां हासिल करना चाहती हैं। ये कमांड पाकिस्तान से लगती पश्चिमी और उत्तरी सीमा पर तैनात किए जाने की योजना है। चीन के साथ लगते बॉर्डर के लिए भी एक कमांड तैयार होगी।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार, विदेशी सीक्रेट एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहां पर और किस तरह के हथियारों की जमावड़ा हो रहा है। विदेशी एजेंसियों के लोग फर्जी नाम से व्हाट्सएप चैट के जरिए जवानों और अधिकारियों के करीब आने का प्रयास करते हैं। प्रोफाइल में महिला का फोटो यूज किया जाता है। ये लोग कई तरह का लालच भी देते हैं। जवानों से ऐसी बात कही जाती हैं कि वे फलां क्लासिफाइड या प्रतिबंधित सूचना देते हैं तो उसके बदले उन्हें कुछ सुविधा प्रदान की जाएगी। सेना के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भी इसी तरकीब से खुफिया जानकारी जुटाई जाती है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें