ट्रंप प्रशासन जनवरी, 2019 से एच1-बी वीजा नीति में बड़े बदलाव का प्रस्ताव लाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर सबसे ज्यादा भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा। इस बीच, यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस (यूएससीआईएस) ने एक और प्रस्ताव दिया है, जो अगर मंजूर हो जाता है, तो विदेशी पेशेवर एच1-बी वीजा के लिए आवेदन ही नहीं कर पाएंगे।
ट्रंप प्रशासन ने हाल में एच1-बी वीजा का दुरुपयोग रोकने के लिए पेशे में सर्वश्रेष्ठ लोगों को ही यह सुविधा देने का प्रस्ताव रखा था। यूएससीआईएस का कहना है कि ट्रंप का यह एजेंडा तभी संभव हो पाएगा जब हर साल जारी किए जाने वाले 85,000 वीजा विदेशी छात्रों को ही मिलें। इसी को देखते हुए यूएससीआईएस ने अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए प्री-रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। अगर ऐसा हुआ तो कोई भी विदेशी आवेदक एच1-बी वीजा का आवेदन ही नहीं कर पाएगा।
यूएससीआईएस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एच1-बी वीजा रखने वाले हर चार में तीन लोग भारतीय हैं। 5 अक्तूबर, 2018 तक कुल 4,19,637 विदेशी नागरिकों को एच1-बी वीजा जारी किए गए। इनमें 3,09,986 भारतीय हैं। यह रिपोर्ट ट्रंप प्रशासन के एच1-बी वीजा में बड़े बदलावों के प्रस्ताव के एक दिन बाद जारी की गई है।
भारतीयों में लैंगिक असमानता बहुत अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, एच1-बी वीजा पाने वाले भारतीयों में लैंगिक असमानता बहुत ज्यादा है। अक्तूबर तक एच1-बी वीजा पाने वाले 3,09,986 भारतीयों में केवल 63,220 (20.4 फीसदी) महिलाएं हैं। वहीं, 2,45,517 यानी 79.2 फीसदी पुरुष हैं। बाकी 1,249 भारतीयों को अन्य या लापता श्रेणी में रखा गया है।
चीनी नागरिक दूसरे नंबर पर
भारत के बाद चीन के लोगों को सबसे ज्यादा एच1-बी वीजा जारी किए गए। इस साल 47,172 चीनी नागरिकों को वीजा दिया, जो कुल वीजा का 11.2 फीसदी है। इसके बाद कनाडा और दक्षिण कोरिया को 1.1 फीसदी वीजा जारी किए गए। वहीं, फिलीपींस की महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले ज्यादा वीजा दिए गए। अमेरिका ने फिलीपींस के लोगों को कुल 3,250 एच1-बी वीजा जारी हुए, जिनमें 1,712 महिलाओं को और 1,519 पुरुषों को दिए गए।
लापता नागरिक के लिए दबाव बनाना पड़ा।