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भारतीय सोशल मीडिया में विदेशी घुसपैठ, आपत्तिजनक सामग्री डालने वाले 2245 यूआरएल ब्लॉक

Fri, 03 Aug 2018 02:23 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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विदेशों में प्रतिबंधित संगठन भारतीय सोशल मीडिया में सेंध लगा रहे हैं। अपने लोकल स्लीपर सेल की मदद से उन्होंने सोशल मीडिया पर हजारों फर्जी यूआरएल (यूनीफॉर्म रीसॉर्स लोकेटर) बना लिए हैं। वे इन पर आपत्तिजनक सामग्री, खासतौर से देश के हितों को संकट में डालने वाली और समाज में तोड़फोड़ कराने वाली पोस्ट डालते रहते हैं।
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केंद्र सरकार ने पिछले एक साल में ऐसी हरकत करने वाले 2245 यूआरएल पकड़े हैं। इनमें से 1662 यूआरएल ब्लॉक कर दिए गए हैं। बाकी बचे यूआरएल भी दो माह में बंद कर दिए जाएंगे।

इस तरह होती है सोशल मीडिया में घुसपैठ......

आईटी विभाग के मुताबिक, सोमालिया, पाकिस्तान, ईरान, सूडान, बांग्लादेश, चीन, अफगनिस्तान, दुबई और पश्चिमी देशों में कई ऐसे संगठन मौजूद हैं। इन्होंने भारत में युवा वर्ग को अपना टारगेट बनाया है। 
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युवाओं को थोड़ा बहुत फायदा देकर ये संगठन अपनी मनमर्जी से गैर-कानूनी एवं आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया में चलवाते रहते हैं। कुछ युवा तो महज फ्री अनलिमिटेड इंटरनेट प्लान के चक्कर में आकर गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों से कश्मीर में चल रहे कई ऐसे समूह पकड़े थे, जिन्हें सीधे तौर पर सीमा पार से दिशा-निर्देश मिलता था। पत्थर फेंकने वाले अधिकांश समूह इन्हीं संगठनों से जुड़े हुए थे। इनके स्लीपर सेल सभी राज्यों में मौजूद हैं।

उत्तरपूर्व के अलावा, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में मौजूद हैं। 

गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में 24 जुलाई को बताया था कि विधि प्रवर्तन एजेंसी सोशल मीडिया पर नज़र रख रही हैं। आईटी एक्ट 2000 की धारा 69ए के तहत गैर कानूनी सामग्री वाली साइटों को ब्लॉक किया जा रहा है। अगर इसके बाद भी कोई अपनी हरकत से बाज नहीं आता है तो
उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।

अभी तक बंद हुए हैं इतने यूआरएल...
फेसबुक-956
यू-ट्यूब-152
ट्विटर-409
इंस्टाग्राम-66
अन्य-79
इतने दो माह में बंद हो जाएंगे.....
फ़ेसबुक-1076
यू-ट्यूब-182
ट्विटर-728
इंस्टाग्राम-150
अन्य-79
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आजीवन कारावास और दस लाख रुपये तक का आर्थिक दंड भी है 

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और साइबर लॉ एक्स्पर्ट पवन दुग्गल का कहना है, अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया के ज़रिए क़ानून के खिलाफ कोई भी हरकत करता है तो उसे वह महंगा पड़ सकता है।

अगर मामला साबित हो जाता है तो आजीवन कारावास और एक लाख से लेकर दस लाख रुपए तक का जुर्माना करने का प्रावधान है। दुग्गल के मुताबिक, देखने में आया है कि केवल यूआरएल बंद करने से कोई खास फायदा नहीं होता।

जब भी कोई यूआरएल बंद होता है तो उस साइट को देखने वालों की संख्या बढ़ने लगती है। वे अप्रत्यक्ष रूप से दूसरे सर्विस प्रोवाइडर की मदद या अन्य तरीकों से आपत्तिजनक सामग्री को आगे बढ़ाने लगते हैं।

सरकार को ऐसे मामलों में सख्त रवैया अख्तियार करना होगा। किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर कुछ डालने से पहले ध्यान रखना चाहिए कि वह कोई आपत्तिजनक या गै कानूनी सामग्री तो पोस्ट नहीं कर रहा है। विशेषकर यूथ को ऐसे मामलों में सचेत रहने की जरूरत है। 
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