वहीं, शिरडी में श्री सांई बाबा संस्थान ट्रस्ट के चीफ अकाउंट ऑफिसर बाबासाहेब घोरपडे ने बताया कि उन्हें इनपुट क्रेडिट के रूप में 18 फीसदी सीजीएसटी, एसजीएसटी चुकाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हम कोई प्रोफिट नहीं कमाते और न ही कोई व्यवसायिक गतिविधियां चलाते। उन्होंने दान से आने वाली रकम को जीएसटी से बाहर रखने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी आने से पहले हम वैट के दायरे से बाहर थे और पिछले साल जीएसटी के क्रियान्वयन से पहले कमिश्नर को पत्र भी लिखा था। उन्होंने बताया कि वे सारी रकम धर्मार्थ कार्यों चैरिटी आदि पर खर्च करते हैं, गरीब बच्चों के लिए शिक्षण संस्थान चलाते हैं और अस्पतालों में फ्री में इलाज करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बैठक में जीएसटी से मुक्ति मिलेगी।
विहिप ने दिया समर्थन
वहीं इस मुद्दे पर विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन का कहना है कि हम केन्द्र सरकार से बहुत पहले से मांग कर रहे हैं कि तिरुपति, शिरडी या सिद्धिविनायक मंदिर हो, वहां प्रसाद मुफ्त में दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वहां कोई व्यवसाय नहीं चला जा रहा और दान में मिलनी वाली रकम के एक-एक पैसे का उपयोग धर्मार्थ कार्यों में किया जाता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले भी सरकार को पत्र लिखकर धूप-अगरबत्ती, प्रसाद आदि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की थी।
साई बाबा से जुड़े शिरडी प्रसादालय में रोजाना दस लाख श्रद्धालु न्यूनतम शुल्क देकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। वहीं तिरुपति में 2 लाख लोग मुफ्त प्रसाद लेते हैं। गुरुदारा स्वर्ण मंदिर में रोजाना 2 लाख और सप्ताह के आखिर में 5 लाख मुफ्त लंगर चखते हैं। दिल्ली में गुरुद्वारा बंगला साहिब में ये संख्या 25 से 30 हजार की है। हरिद्वार में स्थित गायत्री परिवार में भी रोज 10,000 लोग और खास दिनों में 35,000 हजार लोग मुफ्त प्रसाद ग्रहण करते हैं।
हजार करोड़ रुपए मिले दान में
गौरतलब है कि तिरुमाला तिरुपथि देवस्थानम और शिरडी सांई मंदिर दोनों की देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक हैं। साल 2016-17 में तिरुपति मंदिर ने चढ़ावे में 1,038 करोड़ रुपए की रकम मिली थी और 2.698 करोड़ श्रद्धालुओं ने मंदिर के दर्शन किए थे। जहां प्रसादम के रूप में 10.46 करोड़ लड्डुओं की बिक्री की।
साल 2017-18 में मंदिर ने बिना कोई कर चुकाए सालाना 2,858 करोड़ का बजट रखा था। वहीं शिरडी में पिछले 4 सालों में भक्तों ने करीब 1000 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा चढ़ाया, जबकि मुंबई के सिद्धिविनायक में 206 करोड़ रुपए का चढ़ावा आया।
इससे पहले 1 जून को केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के लंगर को जीएसटी से मुक्त कर दिया था और इस संबंध में 300 करोड़ रुपए का जीएसटी वापस करने का ऐलान किया था। गौरतलब है कि लंगर और प्रसाद पर पहले कोई टैक्स नहीं लगता था। लेकिन 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद लंगर और प्रसाद को इस दायरे में रखा गया। इनपर जीएसटी लगने से मोदी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ रही थी।