विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को रायसीना डायलॉग कार्यक्रम के दौरान कहा कि आतंकवाद के मौजूदा खतरे से कोई भी देश सुरक्षित नहीं है। यह सुनिश्चित किया जाना समय की मांग है कि आतंकवाद और उसका इस्तेमाल करने वालों को कतई बर्दाशत न किया जाए।
स्वराज ने कहा कि भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा था कि अंतररष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक सम्मेलन आयोजित किया जाए लेकिन आज भी यह केवल मसौदा बना हुआ है क्योंकि सभी राष्ट्र आतंकवाद की एक आम परिभाषा पर सहमत नहीं हो पाए हैं।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना समय की मांग है कि आतंकवाद और सुविधा के अनुसार उसका इस्तेमाल करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सामूहिक विनाश के लिए हथियारों का प्रसार और जलवायु परिवर्तन को भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए मुख्य चुनौती बताया।