भारत और साइप्रस अपने राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। ऐसे में विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों साइप्रस की अपनी पहली यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की तरफ से सेवाएं देने वाले भारतीय शांतिरक्षकों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने साइप्रस में वह सड़क भी देखी, जिसका नाम जनरल के एस थिमैया के नाम पर रखा गया है।
1965 तक जनरल थिमैया ने दी थी सेवा
उन्होंने कहा, “जनरल थिमैया ने 1965 में अपने निधन तक साइप्रस में सेवाएं दीं। तुर्की के आक्रमण के दौरान नागरिकों की सुरक्षा, विदेशी राजनयिकों को बचाकर लाने और निकोसिया में हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए जनरल चंद के अथक प्रयासों को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। जनरल थिमैया भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित सैनिक थे। वह 1957 से 1961 तक सेना प्रमुख रहे। उनका कार्यकाल खत्म होने के ठीक बाद 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था।
कोरियाई युद्ध के बाद, थिमैया ने युद्ध बंदियों की अदला-बदली के मामले देखने वाली वाली संयुक्त राष्ट्र इकाई का नेतृत्व किया था। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक बल की कमान संभाली थी। साइप्रस में ही 1965 में दिल का दौरा पड़ने के बाद उनका निधन हो गया था। वर्ष 1948 से, दुनियाभर में स्थापित 71 में से 49 संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में 2,00,000 से अधिक भारतीय सुरक्षाकर्मी सेवाएं दे चुके हैं।