जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत को रूस ने जो दर्जा दिया है, वो किसी भी अन्य देश को नहीं दिया गया है। सर्गेई ने कहा कि रूस का संबंध भारत और चीन दोनों से काफी मजबूत है। वहीं, सर्गेई अमेरिका पर हमलावर दिखे।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई ने कहा, 'हम इन दोनों (भारत-चीन) महान राष्ट्रों के मित्र बनने में रुचि रखते हैं। यह रूस, चीन और भारत की तिकड़ी बनाने की पहल मेरे पहले के विदेश मंत्री ने की थी। इसका नतीजा रहा कि ब्रिक्स का गठन हुआ। मेरी भावना यह है कि ये तीनों देश जितना अधिक मिलेंगे, उतना रिश्ते बेहतर होंगे।
और क्या बोले सर्गेई?
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई ने कहा, 'चीन और भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं। भारत के साथ संबंधों को रूस ने 'विशेष विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार' का दर्जा दिया है। ये दर्जा आधिकारिक है और दस्तावेजों में है। मुझे नहीं लगता कि हमने किसी अन्य देश को आधिकारिक तौर पर इस तरह का समान दर्जा दिया है।'
सर्गेई ने आगे कहा, 'हम कभी किसी देश को किसी दूसरे देश के खिलाफ षडयंत करने में शामिल नहीं होते हैं लेकिन दुर्भाग्य से कुछ अन्य बाहरी खिलाड़ियों द्वारा तथाकथित इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदर्भ में क्वाड का उपयोग किया जा रहा है। आज क्वाड का उपयोग आर्थिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जा रहा है। बल्कि इसका सैन्यीकरण करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, 'आसियान प्लस क्वाड के हमारे अमेरिकी मित्रों द्वारा प्रचारित विचार खुले तौर पर पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों को बर्बाद करने के उद्देश्य से है। दूसरे शब्दों में इसका अर्थ है पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन बिना चीन और रूस के है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले?
सर्गेई ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'हर कोई पूछ रहा है कि रूस कब बातचीत के लिए तैयार होगा लेकिन जेलेंस्की से कोई नहीं पूछता कि वह कब बातचीत करने जा रहे हैं। पिछले साल, जेलेंस्की ने एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उस दस्तावेज में लिखा था कि जब तक पुतिन मौजूद हैं, तब तक रूस के साथ बातचीत करना आपराधिक अपराध है। क्या आप उनसे पूछ सकते हैं कि वह क्या कर रहे हैं?
एक दिन पहले भारत से मांगी थी माफी
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई ने एक दिन पहले भारत से माफी भी मांगी थी। उन्होंने भाषण के दौरान कहा, 'पश्चिमी देशों ने जी-20 के मुख्य एजेंडे को तमाशा बनाकर रख दिया है। अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के कारण जी-20 की बैठकों में यूक्रेन का मुद्दा हावी हो गया। इस कारण जी-20 में भारत की ओर से उठाए गए विकास के मुद्दे काफी पीछे छूट गए।'
सर्गेई ने भारत से माफी मांगते हुए कहा, 'मैं कई पश्चिमी प्रतिनिधिमंडलों के अभद्र व्यवहार के लिए भारत की मेजबानी और ग्लोबल साउथ के देशों के सहयोगियों से माफी मांगना चाहता हूं। पश्चिमी प्रतिनिधिमंडलों ने जी-20 एजेंडे पर काम को एक तमाशा बनाकर रख दिया है।'
जी-20 में पहले कभी इराक, अफगानिस्तान व लीबिया की बातें क्यों नहीं हुईं
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जी-20 की बैठक में यूक्रेन का मुद्दा उठाने पर पश्चिमी देशों को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा, इससे पहले समूह की चर्चाओं में कभी इराक, लीबिया, अफगानिस्तान, यूगोस्लाविया के हालात को प्रमुखता के साथ क्यों नहीं उठाया गया। शुक्रवार को रायसीना डायलॉग में शामिल होते हुए लावरोव ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि युद्ध खत्म करने के लिए हर बार रूस से ही यह क्यों पूछा जाता है कि वह बातचीत के लिए तैयार है या नहीं। कोई यूक्रेन से यह बात क्यों नहीं पूछता, जिसके राष्ट्रपति ने एक डिक्री पर हस्ताक्षर कर पुतिन के रहते रूस से बातचीत को ‘अपराध’ बना दिया है।
रूस एक-दूसरे देशों को नहीं लड़ाता
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में चर्चा में भाग लेते हुए लावरोव ने कहा, रूस कभी भी किसी देश से दूसरे देश के खिलाफ नहीं लड़ता, जैसा कि पश्चिमी देश क्वाड का इस्तेमाल कर हिंद-प्रशांत के संदर्भ में कर रहे हैं। अमेरिका के आसियान प्लस क्वाड के प्रचार का मकसद पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को बर्बाद करना है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन से रूस और चीन को बाहर रखना है।