विदेशी हथियारों पर अब 'मेड इन इंडिया' का टैग नजर आयेगा। यूएस और यूके में स्पेशल फोर्स द्वारा प्रयोग की जा रही रायफलों पर मेड इन इंडिया का टैग होगा। थिरुविदंथाई में डिफेंस एक्सपो 2018 में पांच से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने अपने प्लान के बारे में जानकारी दी है। ये राइफल्स और हथियार भारतीय सेना द्वारा प्रयोग किये जा रहे हथियारों से बहुत ज्यादा आधुनिक हैं।
इन हथियारों को विदेशी पार्टनर्स को एक्सपोर्ट किया जायेगा। अधिकारियों के मुताबिक इन हथियारों को भारतीय सेना में शामिल करने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि खरीद प्रक्रियाएं बहुत लंबी चलती हैं। छोटे हथियार, राइफल्स और स्नाइपर राइफल्स को डिजर्ट टेक ऑफ यूएसए द्वारा बनाया जाता है वहीं लीविस मशीन, टूल कंपनी और स्टेयर मनलीचेर ऑफ ऑस्ट्रेलिया को भारतीय पार्टनर्स द्वारा बनाया जाएगा।
नेको डिजर्ट टेक डिफेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर आनंद जायसवाल ने कहा कि हमने जेवी कंपनी को ट्रांसफर ऑफ टेक्नालॉजी के तहत राइफल्स बनाने का जिम्मा सौंपा है। भारत सरकार ने डेढ़ महीने पहले ही लाइसेंस दिया है। कंपनी आने वाले कुछ महीनों में राइफल्स बनाने का काम शुरू कर देगी।
इन राइफल्स का प्रयोग स्पेशल फोर्स द्वारा चेक रिपब्लिक, यूएई लिथुआनिया, थाईलैंड और कई देशों के द्वारा किया जाता है। स्टंप स्कूयल के मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश मछानी ने कहा कि हमने लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है, जैसे ही हमे लाइसेंस मिलेगा, हम काम शुरू कर देंगे।सीबीसी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी हथियार निर्माता कंपनी है और उसकी योजना है कि वो भारत में अपनी आंतरिक शाखाओं को विकसित करे। जिसके बाद हम हथियारों को एक्सपोर्ट कर सकेंगे।