ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी पूर्वी अजरबैजान से लौट रहे थे। तभी उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया और इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। उनके निधन की खबर से पूरी दुनिया सदमे में है। भारत के विदेश मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन का कहना कि यह घटना सभी के लिए आश्चर्यजनक और सदमा देने वाली है। साथ ही यह भी कहा कि घटना को लेकर अभी किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बात की अधिक संभावना है कि मौसम खराब होने या शायद कोई तकनीकी गड़बड़ी आने के चलते हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ।
हर कोई अटकलें लगा रहा
सुशांत सरीन ने कहा, 'बेशक हर कोई अटकलें लगा रहा है। जैसे क्या यह किसी प्रकार की तोड़फोड़ थी? सच में फिलहाल किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, मैं कहूंगा कि इस बात की अधिक संभावना है कि यह घटना पूरी तरह से मौसम से संबंधित थी और शायद एक तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसने हेलीकॉप्टर को नीचे गिरा दिया। इस तरह के इलाकों में अगर हेलिकॉप्टर नीचे आता है, तो लैंडिंग कराना कठिन है। आपको इस तरह की दुर्घटना से बचने के लिए बहुत भाग्यशाली होना चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'यह ईरान में घटी एक त्रासदी है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसका ईरानी व्यवस्था पर कोई असर होगा। क्योंकि कट्टरपंथियों का नियंत्रण बहुत हद तक है। रईसी एक कट्टरपंथी थे, कुछ लोग दावा करते हैं कि वह सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकारी बनने की कतार में थे और अब वह चले गए हैं। शायद सर्वोच्च नेता के स्पष्ट उत्तराधिकारी बनने के लिए उस स्तर पर एक दौड़/ संघर्ष होने वाला है।
सरीन ने यह भी कहा कि यह सभी के लिए आश्चर्य और सदमे की बात थी। लेकिन उस क्षेत्र के मौसम और इलाके को देखते हुए यह पूरी तरह संभव है कि यह महज एक दुर्घटना हो।
हमें नहीं पता कि ऐसा कुछ हुआ है या नहीं
उन्होंने कहा, 'अब, हमें नहीं पता कि ऐसा कुछ हुआ है या नहीं, हमें नहीं पता कि क्या यह कोई तकनीकी खामी है जिसकी वजह से हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हम नहीं जानते कि यह मौसम से संबंधित दुर्घटना है या नहीं। लेकिन उस इलाके और मौसम को देखते हुए संभावना यही है कि यह हादसा खराब मौसम की वजह से हुआ होगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसा कि मैंने कहा कट्टरपंथी सत्ता को नियंत्रित करना जारी रखे हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि ईरान की घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ा बदलाव आने वाला है।'
ईरान के साथ समझौते पर नहीं पड़ेगा कोई असर
हाल ही में भारत और ईरान के बीच हुए चाबहार बंदरगाह समझौते पर उन्होंने कहा, 'हमने चाबहार बंदरगाह पर जो समझौता किया है या ईरान के साथ हमारे जो अन्य समझौते हैं। वे व्यक्ति-विशिष्ट नहीं हैं। वे दो देशों के बीच के सौदे और समझौते हैं। मुझे नहीं लगता कि इससे कोई प्रभाव पड़ेगा। दूसरा हिस्सा यह है कि पश्चिमी मीडिया, पश्चिमी पारिस्थितिकी तंत्र में पश्चिमी सरकारें इसे कैसे पेश करती हैं।'