विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय लगातार मौसम विज्ञान संबंधी प्रेक्षणों, संचार, मॉडलिंग उपकरणों और पूर्वानुमान प्रणालियों को बढ़ाता और उन्नत करता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), गंभीर मौसम की घटनाओं का पूर्वानुमान करने के लिए नवीनतम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है। अब इसमें 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और 'मशीन लर्निंग' टूल की मदद ली जा रही है। इनके जरिए मौसम की सटीक जानकारी एकत्रित करने में सहायता मिली है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भौतिकी आधारित संख्यात्मक मॉडलों के अलावा मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और 'मशीन लर्निंग' प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने के लिए कार्य कर रहा है।
गत सप्ताह संसद सत्र के दौरान राज्यसभा सदस्य जोस के मणि ने मौसम को लेकर कई सवाल पूछे थे। उन्होंने पूछा, सरकार द्वारा देश की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। क्या मंत्रालय ने पूर्वानुमानों की सटीकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) या मशीन लर्निंग जैसी कोई उन्नत तकनीक अपनाई है। बेहतर फसल प्रबंधन के लिए ग्रामीण किसानों को वास्तविक समय पर मौसम संबंधी जानकारी देने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय लगातार मौसम विज्ञान संबंधी प्रेक्षणों, संचार, मॉडलिंग उपकरणों और पूर्वानुमान प्रणालियों को बढ़ाता और उन्नत करता है। इसमें उच्च स्थानिक और कालिक विभेदन पर परिष्कृत गतिशील संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल, बहु-मॉडल समावेशन विधियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग और डेटा विज्ञान पद्धतियां शामिल हैं, जिन्हें वास्तविक समय में निगरानी और पूर्वानुमानों के लिए बेहतर-भूमि आधारित और उपरितन वायु के प्रेक्षण तथा उन्नत रिमोट सेंसिंग नेटवर्क द्वारा सहायता दी जाती है।
आईएमडी, कुशल, प्रभावी और समय पर पूर्व चेतावनी सेवाएं प्रदान करने के लिए कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल (सीएपी), मोबाइल ऐप, वेबसाइट, एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म सहित नवीनतम प्रसारण उपकरणों का उपयोग करता है। आईएमडी लगातार सुधार करने और नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए काम कर रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भौतिकी आधारित संख्यात्मक मॉडलों के अलावा मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने के लिए कार्य कर रहा है। यह पहल मौसम विज्ञान संबंधी पूर्वानुमानों की सटीकता और दक्षता को बढ़ाने की व्यापक रणनीति का एक भाग है, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
मंत्रालय ने पुणे में भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) में एआई/एमएल/डीप लर्निंंग पर एक समर्पित वर्चुअल केंद्र स्थापित किया गया है। एआई/एमएल में अनुसंधान और विकास गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन आईएमडी में एक समर्पित कार्यात्मक समूह की स्थापना की गई है। ये केंद्र पृथ्वी विज्ञान में प्रगति के लिए एआई, एमएल और डीएल तकनीकों का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसने पहले ही स्थानीयकृत पूर्वानुमानों तथा मौसम और जलवायु पैटर्न के विश्लेषण के लिए अनुकूलित अनेक एआई/एमएल आधारित एप्लिकेशन विकसित किए हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आदि के सहयोग से मौजूदा 130 कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों के माध्यम से ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना के तहत किसानों को मौसम पूर्वानुमान आधारित कृषि परामर्शिका सेवाएं प्रदान कर रहा है। कृषि मौसम विज्ञान इकाई अपने अपने जिलों के लिए कृषि परामर्शिकाएं तैयार करते हैं और उन्हें मास मीडिया, मोबाइल एप, एसएमएस आदि सहित विभिन्न माध्यमों से प्रसारित करते हैं।