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उपलब्धि: पहली बार रोटा, एडिनो व नोरो वायरस की एकसाथ जांच, आईसीएमआर के वैज्ञानिकों की खोज हुई सफल

Tue, 13 Jun 2023 06:03 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।

सार

आरटीपीसीआर आधारित इस तकनीक का इस्तेमाल हाल में कोरोना वायरस की जांच में किया जा रहा है। इस मल्टीप्लेक्स 2-ट्यूब रीयल-टाइम आरटीपीसीआर की मदद से मरीज के केवल एक नमूना लेकर रोटा वायरस, एडिनो वायरस और नोरो वायरस तीनों की जांच की जा सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश में पहली बार रोटा, एडिनो और नोरो वायरस की जांच एकसाथ संभव होगी। ये तीनों वायरस बच्चों में डायरिया का मुख्य कारण हैं, जो कई बार जानलेवा बन जाते हैं। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और कोलकाता स्थित राष्ट्रीय हैजा और आंत्र रोग संस्थान (एनआईसीईडी) के वैज्ञानिकों ने लंबे समय की खोज के बाद इनकी एकसाथ जांच की तकनीक तलाशने में सफलता मिली है।

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आरटीपीसीआर आधारित इस तकनीक का इस्तेमाल हाल में कोरोना वायरस की जांच में किया जा रहा है। इस मल्टीप्लेक्स 2-ट्यूब रीयल-टाइम आरटीपीसीआर की मदद से मरीज के केवल एक नमूना लेकर रोटा वायरस, एडिनो वायरस और नोरो वायरस तीनों की जांच की जा सकती है।

हर साल जाती है 5.20 लाख बच्चों की जान
भारत में हर साल डायरिया से औसतन 5.20 लाख बच्चों की मौत होती  है। वैश्विक स्थिति की बात करें, तो पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में डायरिया मौत का तीसरा सबसे आम कारण है। इस आयु में हर साल 13 फीसदी मौतें डायरिया की वजह से हो रही हैं। इनके अलावा, आंतों के संक्रमित होने के 40 फीसदी मामलों के लिए यही तीनों रोटा वायरस, ह्यूमन एडेनो वायरस प्रजाति एफ और नोरो वायरस जिम्मेदार हैं। इसके बावजूद, भारत की प्रयोगशालाओं में इनकी जांच उपलब्ध नहीं है। केवल रोटा वायरस को लेकर एलाइजा किट से जांच संभव है।
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95 फीसदी सटीक
एनआईसीईडी की निदेशक डॉ. शांता दत्ता ने बताया कि यह तकनीक बच्चों की आंतों में वायरस पहचान करने में 95 फीसदी तक असरदार पाई गई। सीमित नैदानिक जांच से अक्सर वायरस का पता नहीं चल पाता। कई बार गलत निदान भी हो सकता है, जिससे एंटीबायोटिक दवाओं का अतार्किक उपयोग होने लगता है। इन वायरस की पहचान के लिए अभी कोई भी भारतीय कंपनी आणविक डायग्नोस्टिक किट नहीं बना रही। एनआईसीईडी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ममता चावला सरकार के अनुसार, आरटीपीसीआर से महज चार घंटे के अंदर आंतों में छिपे वायरस की पहचान हो सकती है।

जल्द बाजार में आएगी
भारतीय बाजार में इस तकनीक को उपलब्ध कराने के लिए आईसीएमआर ने निजी कंपनियों से करार करने का फैसला किया है। इसी साल के अंत तक बाजार में तकनीक उपलब्ध होगी।  निजी कंपनियां हर किट पर पांच फीसदी रॉयल्टी देंगी।

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