सोशल मीडिया पर आतंकी संगठन आईएसआईएस की सक्रियता, अफवाहों, अश्लीलता और साइबर अपराधों पर निगरानी के लिए पुलिस अब ऑनलाइन दोस्त बनाएगी।
इसके लिए क्राइम ब्रांच की सर्विलांस सेल, हर थानेदार, चौकी प्रभारी और उनके अधीनस्थ कांस्टेबल सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और वाट्सएप, हाइक जैसे मोबाइल एप्लीकेशन पर सक्रिय रहकर अपनी फ्रेंड सर्किल बढ़ाएंगे। स्मार्ट पुलिसिंग की इस मुहिम को मूर्त रूप देने के लिए महकमे के आला अधिकारियों ने मातहतों को अपडेट होने का एक माह का समय दिया है।
बीते साल मुजफ्फरनगर दंगे में सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो की अहम भूमिका सामने आई थी। वहीं, देश की शीर्षस्थ सुरक्षा एजेंसियां बार-बार अलर्ट जारी कर रही हैं कि सीरिया के इस्लामिक स्टेट सहित अन्य आतंकी संगठन अब देश के युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। जबकि अफवाहों और अश्लीलता की बाढ़ के साथ ही तरह-तरह के भ्रामक ऑफर देकर रुपये ऐंठने की बातें भी सोशल मीडिया पर आम हैं।
यूपी पुलिस इन पर सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्रभावी अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है। सोमवार को ‘अमर उजाला’ से फोन पर पीएसी पूर्वी जोन लखनऊ के आईजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि सूबे के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर अब सभी जिलों की पुलिस को सोशल मीडिया और इससे जुड़े मोबाइल एप्लीकेशन पर सक्रिय किया जा रहा है।
कंपनियां लगाती हैं समय इसलिए लिया गया निर्णय
फेसबुक
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निर्देशित किया गया है कि सर्विलांस सेल, थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी और कांस्टेबल अप्रैल के पहले सप्ताह तक इस मुहिम में शामिल होने के लिए खुद को अपडेट कर लें। सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को मित्र बनाएं। अफवाहों, अश्लीलता, अपराधों पर निगरानी रखें, कार्रवाई करें और जहां उचित लगे वहां पुलिस का पक्ष रखकर बताएं कि क्या सही और क्या गलत है।
आईजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि सोशल मीडिया के कंटेट्स से संबंधित जानकारी मांगने पर इनसे जुड़ी निजी कंपनियां जैसे फेसबुक, गूगल आदि जवाब देने में काफी समय लगाती हैं।
इसके लिए ऐसी कई कंपनियों पर भारत सरकार ने ही नहीं बल्कि रूस और अमेरिका की सरकार ने भी नाराजगी जताई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामाजिक तनाव बढ़ाने वाले फोटो या वीडियो वायरल करने सहित तमाम अन्य प्रकार की समाज विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस का इंटरनेट फ्रेंडली होना बेहद जरूरी है।