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रिहाई के लिए सेंट्रल जेल के कैदियों ने शुरू की भूख हड़ताल

Tue, 30 Aug 2016 05:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
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सेंट्रल जेल में सोमवार सुबह 100 से अधिक  कैदियों ने रिहाई के लिए भूख हड़ताल कर दी। इन्हें उम्र कैद की सजा मिली है जबकि जेल में 14 साल से अधिक  बिता चुके हैं। इस हड़ताल से कारागार मंत्री तक टेंशन में आ गए। उन्होंने जेल अधिकारियों से फोन पर बात की।  इसके बाद कैदियों को मनाया गया। ज्यादातर मान गए लेकिन तीन-चार ने शाम को भी भोजन करने से मना कर दिया।
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सेंट्रल जेल में ऐसे 350 कैदी हैं जिन्हें यहां 14 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इनकी रिहाई के लिए जेल प्रशासन ने कई बार प्रयास किए लेकिन कभी शासन से फाइल लौटा दी गई तो कभी पुलिस की रिपोर्ट नेगेटिव रही। इसके चलते रिहाई नहीं हो पाई। इस बीच राजस्थान और मध्य प्रदेश में ऐसे कैदियों की रिहाई हुई है, जो चौदह साल से अधिक सजा काट चुके थे।

इसके अलावा 65 साल से अधिक उम्र के कैदी भी रिहा किए गए हैं लेकिन इन दोनों आधार पर आगरा सेंट्रल जेल से एक भी कैदी की रिहाई नहीं हो पाई। इसके विरोध में रविवार को तीन चार कैदियों ने भोजन करने से मना कर दिया। जेल सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह इनके साथ कई और कैदी मिल गए
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बंदी रक्षकों पर भड़काने का शक

दोपहर को संख्या 100 से ऊपर पहुंच गई। कई कैदियों ने जेल में पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर धरना भी दिया। हालांकि जेलर लाल रत्नाकर का कहना था कि मुश्किल से चार-पांच कैदी हड़ताल कर रहे थे। वह भी बाद में मान गए।

हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहे हरिद्वार के रविंद्र गिरी से मिलने उनकी पत्नी बबिता और बेटी नंदिनी पहुंची। उन्होंने बताया कि अंदर कैदी भूख हड़ताल पर हैं। वह जेल से रिहाई चाहते हैं। सरकार उनकी सुन नहीं रही है। उम्र कैद की सजा पाए जो कैदी 14 साल से ज्यादा बिता चुके हैं, उनमें से ज्यादातर ने हड़ताल कर रखी है। मुलाकाती जो खाना लेकर आ रहे हैं, वह उसे लौटा रहे हैं।

सोमवार को ही जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी ने चार्ज लिया। उस समय कैदियों की भूख हड़ताल चल रही थी। जेल सूत्रों का कहना है कि हड़ताल का एक मकसद नए अधीक्षक पर दबाव बनाना भी रहा। इसके लिए बंदी रक्षकों ने कैदियों को भड़काया। इस सवाल पर जेल अधीक्षक का कहना था कि अगर यह सही पाया गया तो बंदी रक्षकों पर भी कार्रवाई होगी।
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