अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत ने कुलभूषण जाधव मामले में बड़ी जीत दर्ज की है। कोर्ट ने अपने फैसले में किसी भी अंतिम निर्णय से पहले जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है। पूर्व सोलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा 46 वर्षीय जाधव को न्याय दिलाने के लिए भारत के पास दो प्लान थे। पहले प्लान के अनुसार भारत सीधे तौर पर 'न्यायशास्त्र' का आधार पर जाधव की रिहाई का मांग कर सकता था। दूसरा रास्ता काफी लंबा था, पाकिस्तान कोर्ट से होकर गुजरता है।
एक निजी चैनल से बात करते हुए साल्वे ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय कोर्ट उनकी बेगुनाही साबित करने की अदालत नहीं। यह वह मंच है जहां यह साबित किया जाए कि जाधव को सजा-ए-मौत देने के लिए पाकिस्तान द्वारा इख्तियार किया गया रुख विएना संधि का उल्लंघन है।" गौरतलब है कि साल्वे देश के प्रमुख वकीलों में से एक हैं, जिन्होंने न सिर्फ इस केस में भारत की ओर से पैरवी की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लंबी चौड़ी प्रसेंटेशन भी रखी।
भारत की दलील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने जाधव की फांसी पर रोक लगाई। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान को जाधव का कॉन्सुलर एक्सेस देगा होगा क्योंकि अभी तक पाक ने यह साबित नहीं किया का जाधव एक जासूस था। साथ ही कोर्ट ने कहा कि विएना संधि के अनुसार आतंकवाद और जासूसी के मामलों में भी कॉन्सुलर एक्सिस दिया जाना चाहिए।