संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार वैश्विक बाजार में खाद्य कीमतों में गिरावट का जो सिलसिला पिछले साल शुरू हुआ था, वह जनवरी में भी जारी रहा। गेहूं और मक्के के साथ मांस की कीमतों में गिरावट से वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक (फूड प्राइस इंडेक्स) में जनवरी 2024 में भी गिरावट दर्ज की गई। इसी वजह से जनवरी 2024 में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक करीब तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
मांस सूचकांक
मांस सूचकांक लगातार सातवें महीने गिरा है। दिसंबर की तुलना में 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। चीनी के सूचकांक में पिछले महीने की तुलना में 0.8% की वृद्धि हुई है। वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में जो उछाल आया, अनाज और मांस की कीमतों में आई गिरावट ने उसकी भरपाई कर दी है।
2023 में अनाज के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान, मोटे अनाज का दबदबा
एएफओ के अनुसार 2023 में वैश्विक स्तर पर अनाज उत्पादन 283.6 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। यह 2022 की तुलना में 1.2 फीसदी ज्यादा हो सकता है। मोटे अनाज का वैश्विक उत्पादन भी बढ़कर 152.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अनुमान है कि इसमें 1.2 करोड़ टन की वृदि्ध हुई है। यह कनाडा, चीन, तुरि्कये व अमेरिका में उत्पादन वृद्धि के कारण हुई है। इन देशों में अपेक्षा से अधिक पैदावार हुई है। खाद्य और कृषि संगठन के आंकड़ों के अनुसार, मोटे अनाजों के उत्पादन में दुनिया में भारत अब भी पहले स्थान पर है। पूरी दुनिया के करीब 3.05 करोड़ टन उत्पादन में भारत की भागीदारी 1.25 करोड़ टन की है। भारत अकेले 41 फीसदी मोटा अनाज उगा रहा है। पिछले 5 वर्षों के दौरान भारत 1.25 से 1.80 करोड़ टन मोटे अनाज का उत्पादन कर रहा है। भारत श्रीअन्न का सबसे बड़ा उत्पादक है।