वहीं, दिल्ली में आयोजित भाजपा के ‘महा जनसंपर्क अभियान’ में सीतारमण ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान सरकार द्वारा विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन ने भारत को ज्यादा ऋणग्रस्त देश बनने से बचा लिया। उन्होंने कहा, जो लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि भारत का कर्ज उच्च स्तर तक बढ़ गया है, वे वही लोग हैं जिन्होंने सरकार को महामारी के दौरान पैसे छापने और इसे वितरित करने की सलाह दी थी। अगर सरकार ने उनकी सलाह मान ली होती तो हम अब तक सबसे ज्यादा कर्जदार देश बन गए होते और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था नहीं बने होते।
अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की आलोचना करते हुए सीतारमण ने कहा कि आप सरकार के कई मंत्री जेल में हैं, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है, जिसने हाल ही में नौ साल पूरे किए हैं।
सरकार की कुल देनदारियां दिसंबर तिमाही में बढ़कर 150.95 लाख करोड़ रुपये हो गईं, जो सितंबर 2022 को समाप्त हुए तिमाही में 147.19 लाख करोड़ रुपये थीं। यह वृद्धि अक्तूबर-दिसंबर 2022-23 में 2.6 प्रतिशत की तिमाही-दर-तिमाही वृद्धि को दर्शाती है। आंकड़ों की दृष्टि से कहे तो दिसंबर 2022 के अंत में सरकार के सार्वजनिक खाते के तहत कुल देनदारियां बढ़कर 1,50,95,970.8 करोड़ रुपये हो गईं। सितंबर तिमाही के अंत में 89.1 प्रतिशत की तुलना में दिसंबर तिमाही में कुल बकाया देनदारियों में सार्वजनिक ऋण का हिस्सा 89 प्रतिशत था।
भारत 2023 के वित्तीय वर्ष में 7.2 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रमुख राष्ट्र के रूप में उभरा है। आईएमएफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर के संदर्भ में, भारत की जीडीपी बढ़कर 3.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है और 2023 कैलेंडर वर्ष के अंत तक 3.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।