बाढ़ पीड़ितों को ले जाते सुरक्षाकर्मी
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राहत और बचाव अभियान कैसे चलाया जा रहा है?
एएसडीएमए के मुताबिक, प्रशासन ने सात जिलों में 363 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए हैं। इन शिविरों में 1,15,205 विस्थापित लोगों को आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपात सेवा, पुलिस और अन्य नागरिक एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर जोरहाट और शिवसागर सहित विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 1,000 लोगों को सुरक्षित निकाला।
पीड़ितों तक कितनी राहत सामग्री पहुंचाई गई?
पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों में 2,109.84 क्विंटल चावल, 383.93 क्विंटल दाल, 129.91 क्विंटल नमक और 9,646.08 लीटर सरसों का तेल वितरित किया गया। प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा हुआ है।
बाढ़ पीड़ितों को बचाते सुरक्षाकर्मी
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बाढ़ से गांवों, खेती और सुविधाओं को कितना नुकसान हुआ?
राज्य में इस समय 856 गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ के कारण 56,606.78 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कई जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे भी बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ के कारण राज्य में 3,34,020 पालतू पशु और पोल्ट्री भी प्रभावित हुए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और पशुपालन पर भी गहरा असर पड़ा है।
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कौन-कौन सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
डिखौ नदी शिवसागर में, धनसिरी नदी नंगलामुराघाट और नुमालीगढ़ में तथा कुशियारा नदी श्रीभूमि में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इन नदियों का बढ़ता जलस्तर कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना रहा है।